त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का हुआ शुभारंभ, 125 संभागी बने सहभागी
चेन्नई। आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमारजी के सान्निध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा सभा के तत्वावधान एवं तेरापंथ सभा, चेन्नई की आयोजना में तेरापंथ सभा भवन साहूकारपेट में त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का प्रात:कालीन प्रवचन में मंगल मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ हुआ।
मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार ने कार्यशाला के संभागीयों के साथ धर्म सभा को संबोध प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान का मतलब है – एकाग्रता, यानि जिस समय जो कार्य करे, उसके साथ भावक्रिया से जुड़ जाना। साधना के मार्ग में भी एकाग्रता सध जाये, ध्यान की गहराई में उतर जाये, तो भीतर के अखण्ड आनन्द को प्राप्त किया जा सकता हैं।
मुनि श्री ने ध्यान क्यो करना चाहिए के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ध्यान के द्वारा अनावश्यक आसक्ति को छोड़ा जा सकता हैं। बुद्धि का परिष्कार होता हैं| सत्य की प्राप्ति होती हैं और जिस दिन सत्य से साक्षात्कार हो जाता हैं, उस दिन से सारे आग्रह, आवेश, आसक्ति खत्म हो जाती हैं। ध्यान से स्वभाव में परिवर्तन होता हैं| नियमित ध्यान के अभ्यास से भी अगर स्वभाव परिवर्तन नहीं होता तो ध्यान में नहीं अपितु अपनी वृत्तियों, जागरूकता की कमी हो सकती हैं। दीर्घ (लम्बे) श्वास प्रेक्षा से एकाग्रता सधती हैं और एकाग्रता से स्वत: मन ध्यान में लीन हो जाता हैं।
मुनि श्री ने आगे कहा कि ध्यान के द्वारा भोग और योग में संतुलन बैठाया जा सकता हैं और धीरे धीरे भोगासक्ति से छुटकारा पाया जा सकता हैं। ध्यान चित्त की चंचलता, मन के विकारों, पाँचों इन्द्रियों के विषयों की मूढ़ता को कम करने और स्वयं से स्वयं का साक्षात्कार करने के लिए किया जाता हैं।
मुनि श्री ने आगे कहा कि चालक गाड़ी चलाते समय अपने आप को सुरक्षित पहुचाने के लिए चारों तरफ ध्यान रखता हैं, उसी तरह साधक को आत्मिक शान्ति के लिए ध्यान में संलग्न बने रहना चाहिए।
श्रीमती वसंता बाबेल ने प्रेक्षा गितीका के संगान से मंगलाचरण किया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष श्री विमल चिप्पड़ ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यशाला के संभागीयों, तपस्वीयों के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की। सभा मंत्री श्री प्रवीण बाबेल ने आचार्य महाप्रज्ञ का जीवन परिचय, प्रेक्षाध्यान कार्यशाला की उपयोगिता बताते हुए प्रेक्षा प्रशिक्षक द्वय का परिचय प्रस्तुत किया। वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री पारसमल दूगड़, श्रीमती विमला दुगड़ ने कार्यशाला की उपयोगिता बताते हुए प्रेक्षाध्यान के बारे में जानकारी दी। स्वस्थ रहने के लिए अनेक उपयोगी सूत्र व मुद्राएँ बताई| इस त्रिदिवसीय कार्यशाला में लगभग 125 संभागी अपनी सहभागिता दर्ज करवा रहे हैं।
तपोभिनन्दन समारोह
तपस्वी श्री जुगराज पटावरी के 25 एवं श्रीमती नीतू बोहरा को 9 की तपस्या का प्रत्याख्यान करवाते हुए मुनि श्री ने कहा कि तपस्या आत्म शोधन का साधन हैं, तप से पाप, ताप, संताप का हरण होता हैं, तो तपस्वी को तपस्या में सलक्ष्य स्वाध्याय, ध्यान में भी संलग्न रहना चाहिए| तेरापंथ सभा द्वारा तपस्वीयों का साहित्य मोमेन्टों द्वारा अभिनन्दन किया गया| तपस्वी के परिवार से श्रीमती प्रमीला पटावरी, बोहरा परिवार की बहनों ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति व्यक्त की| कार्यक्रम का कुशल संचालन सभा मंत्री श्री प्रवीण बाबेल ने किया।
अखण्ड आनन्द को पाने का मार्ग हैं-ध्यान : मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार

