नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस बार उनका निशाना है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ दी जा रही धमकियां और गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रही जांच है। राहुल गांधी ने दावा किया है कि अडानी समूह के खिलाफ अमेरिकी जांच के कारण पीएम मोदी ट्रंप की धमकियों के सामने मजबूती से खड़े नहीं हो पा रहे हैं, और उनकी स्थिति कमजोर हो गई है। राहुल गांधी का बयान और आरोप 6 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत, कृपया समझें: राष्ट्रपति ट्रंप की बार-बार की धमकियों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी उनके सामने टिक नहीं पा रहे हैं, क्योंकि अडानी मामले में अमेरिका की जांच चल रही है। एक खतरा मोदी, AA (अडानी-अंबानी), और रूसी तेल सौदों के बीच वित्तीय संबंधों को उजागर करने का भी है। मोदी के हाथ बंधे हुए हैं।”
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी की विदेश नीति अब निजी कंपनियों के हितों के हिसाब से संचालित हो रही है, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति कमजोर हो रही है। उन्होंने दावा किया कि अडानी समूह पर अमेरिकी जांच का दबाव इतना है कि यह भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर रहा है।इसके साथ ही, राहुल ने ट्रंप के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को “मृत” बताया था। राहुल ने इस बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि पूरी दुनिया जानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है, और इसके लिए उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों, जैसे नोटबंदी, GST, और अडानी-मोदी साझेदारी को जिम्मेदार ठहराया।
उल्लेखनीय है कि 2024 के नवंबर में, अमेरिकी न्याय विभाग और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने गौतम अडानी और उनकी कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। यह मामला 265 मिलियन डॉलर (लगभग 2,029 करोड़ रुपये) की कथित रिश्वत से संबंधित है, जो 2020 से 2024 के बीच भारतीय सरकारी अधिकारियों को सौर ऊर्जा अनुबंध प्राप्त करने के लिए दी गई थी। इस मामले में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी सहित सात अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, अडानी समूह ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को हासिल करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया, जिसमें सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देना शामिल था। यह मामला फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (FCPA) के तहत दर्ज किया गया, जो अमेरिकी कंपनियों या व्यक्तियों को विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने से रोकता है। इस जांच में अडानी समूह की सहयोगी कंपनी, एज्योर पावर, भी शामिल है।
न्यूयॉर्क की एक अदालत ने इस मामले में गौतम अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था, जिसने भारत में राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल मचा दी। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और इसे मोदी सरकार के साथ अडानी के कथित करीबी रिश्तों से जोड़ा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही भारत सहित कई देशों पर व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ट्रंप ने भारत पर रूस से सस्ता तेल खरीदने और उसे खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाने का आरोप लगाया। उन्होंने धमकी दी कि भारत को इस वजह से 25% से 41% तक के टैरिफ (आयात शुल्क) का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “भारत न केवल भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है, बल्कि खरीदे गए तेल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में भारी मुनाफे पर बेच रहा है। उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस द्वारा यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं।” इसके जवाब में भारत सरकार ने साफ किया कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों और वैश्विक बाजार की गतिशीलता के आधार पर तय होती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के हिसाब से निर्णय लेते हैं। हमें ट्रंप के आरोपों से जुड़ी कोई विशेष जानकारी नहीं है।”
हालांकि, राहुल गांधी का दावा है कि ट्रंप की इन धमकियों के सामने पीएम मोदी की चुप्पी अडानी मामले से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अडानी और रूसी तेल सौदों के बीच संभावित वित्तीय संबंधों के खुलासे का डर मोदी सरकार को कमजोर कर रहा है। 11 फरवरी 2025 को, पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे से ठीक पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया, जिसके तहत फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (FCPA) को लागू करने पर रोक लगा दी गई। यह वही कानून है, जिसके तहत अडानी समूह के खिलाफ जांच चल रही थी।
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पहले से ही अच्छे निजी संबंध रहे हैं। 2017 से लेकर अब तक दोनों नेताओं की कई हाई-प्रोफाइल मुलाकातें हुई हैं, जिनमें ह्यूस्टन और अहमदाबाद की रैलियां शामिल हैं। हाल ही में फरवरी 2025 में हुई मुलाकात में दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। ट्रंप ने भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स देने की पेशकश भी की। हालांकि, ट्रंप के टैरिफ और भारत के रूस से तेल आयात पर सख्त रुख ने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाया है। भारत ने जवाब में कुछ अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करने और अवैध प्रवासियों को वापस लेने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन राहुल गांधी का कहना है कि ये कदम भारत के हितों के खिलाफ हैं और अडानी मामले के दबाव में उठाए गए हैं।
अडानी के खिलाफ अमेरिकी जांच और ट्रंप की धमकियों पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला
Highlights
- कहा, अमेरिकी जांच और ट्रंप की धमकियों से डरे हुए हैं प्रधानमंत्री, जानें पूरा मामला

