नई दिल्ली:मोहम्मद कैफ का नाम लेते ही भारतीय क्रिकेट फैन्स के जहन में 2002 नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल मैच आ जाता है। इंग्लैंड के लॉर्ड्स मैदान पर भारत ने मेजबान टीम को हराया था और उस जीत के हीरो मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह थे। कैफ और युवराज सिंह की शानदार साझेदारी के दम पर भारत ने उस समय 326 रनों का बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया था। कैफ और युवी उस मैच के बाद भारतीय क्रिकेट फैन्स के लिए हीरो बन गए थे। टीम इंडिया में उस समय सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज क्रिकेटर्स शामिल थे। हाल में कैफ ने एक इंटरव्यू में बताया कि इन दिग्गज क्रिकेटरों के चलते उन्हें और युवी को ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिल सका।
‘सचिन, द्रविड़ जैसे बड़े नाम टीम में शामिल थे’
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कैफ ने कहा, ‘उस समय टीम इंडिया में बड़े नाम जैसे कि सचिन, द्रविड़, सहवाग शामिल थे। इसलिए मुझे और युवराज को ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला, हालांकि युवी को मुझसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला।’ कैफ ने महज 13 टेस्ट मैच खेले हैं। कैफ ने कहा, ‘मुझे 2006 में नागपुर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था, जब कोई खिलाड़ी चोटिल था और मैंने 91 रन बनाए थे। फिर वो खिलाड़ी फिट हो गया और मैं टीम से ड्रॉप कर दिया गया। वो टीम इतनी मजबूत थी कि मुझे ज्यादा मौके ही नहीं मिले। वो सभी दिग्गज क्रिकेटर्स थे। सचिन और द्रविड़ जैसे लीजेंड्स जिन्होंने हम लोगों को प्रेरित किया।’
‘2000 में टेस्ट टीम में शामिल किया गया’
2000 में कैफ की कप्तानी में भारतीय अंडर-19 टीम ने कोलंबो में श्रीलंका को हराकर अंडर-19 वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद उन्हें 2000 में ही बेंगलुरु में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए टीम में चुना गया था। उन्होंने इसको याद करते हुए कहा, ‘जब मुझे टेस्ट टीम के लिए कॉल आया था तो मैं हैरान रह गया था। भारत ने पहली बार अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता था, तो मीडिया में भी इसको लेकर काफी चर्चा थी। तब एक चैलेंजर टूर्नामेंट हुआ था, जिसमें ज्यादातर अंडर-19 क्रिकेटरों को खेलने का मौका मिला था। मैंने बैक टू बैक दो मैचों में 90+ स्कोर बनाया था, फिर मुझे टेस्ट टीम में मौका मिला।’
उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन मुझे लगता है कि टेस्ट क्रिकेट में कुछ जल्दबाजी हो गई, एलन डोनाल्ड, शॉन पोलक, नैंटी हेवार्ड जैसे गेंदबाजों का सामना करने के लिए मैं उस समय बस 20 साल का था। वो काफी तेज गेंदबाज थे। यह मेरे लिए सीखने वाला अनुभव था, यह ऐसा था कि नौसिखिए तैराक को गहरे पानी में डाल दिया गया हो और कहा गया हो कि वो अपनी खुद हेल्प कर ले।’
‘मैं टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार नहीं था’
उन्होंने आगे कहा, ‘सच कहूं तो मैं उस समय उस तरह के तेज गेंदबाजों का सामना करने के लिए तैयार नहीं था, जिनका मैंने पहले कभी सामना नहीं किया था। वो काफी बाउंसर्स फेंकते थे। यह बड़ा अंतर था, फिर मुझे टीम से ड्रॉप कर दिया गया था, वनडे इंटरनैशनल में डेब्यू के लिए मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। इंग्लैंड के खिलाफ अपने होमग्राउंड कानपुर में मैंने वनडे इंटरनैशनल डेब्यू किया था। उन दो सालों में मैंने काफी कुछ सीखा कि इंटरनैशनल लेवल पर कैसे खेलते हैं।’

