लखनऊ:एमपी-एमएलए के विशेष जज पवन कुमार राय ने धोखाधड़ी के मामले में निरुद्ध कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की जमानत अर्जी खारिज कर दी। लल्लू पर बसों का फर्जी दस्तावेज दाखिल करने का आरोप है। बीते 20 मई को उन्हें इस मामले में गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। विशेष जज ने प्रथम दृष्टया उनके इस अपराध को गंभीर करार देते हुए कहा है कि अभी विवेचना प्रचलित है।
विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान फौजदारी के जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज कुमार त्रिपाठी की ओर से लल्लू की जमानत अर्जी का जोरदार विरोध किया गया। उनका कहना था कि लल्लू का इस फर्जीवाड़े से सीधा संबध है। अब तक की विवेचना में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए गए हैं। इन्होंने दबाव बनाने की गरज से स्वंय गृह सचिव को पत्र भेजकर बसों का परमिट जारी करने को कहा था। यह भी तर्क दिया गया कि लल्लू के खिलाफ 18 मुकदमो का अपराधिक इतिहास है। इनमें चार मुकदमे गुण्डा एक्ट के हैं। ये मुकदमें पिछली सरकार के दौरान दर्ज हुए थे। बताया गया कि लल्लू द्वारा इस मामले के अन्य अभियुक्तों के साथ षडयंत्र के तहत बसों की कूटरचित सूची भेजकर लोकसेवक को गलत सूचना दी गई।
लोकसेवकों के काम में बाधा डालने का आरोप
अभियुक्तों ने कोरोना महामारी जैसी विभीषिका में सरकार की छवि धूमिल करने और इन बसों से श्रमिकों के जीवन को खतरे में डालने के प्रयास का अपराध किया है। 1049 बसों की भेजी गई सूची में 31 ऑटो, एक एंबुलेंस, दो डीसीएम, एक प्राइवेट कार, दो टाटा एस वाहन तथा 59 स्कूली बसें थी। साथ ही 70 ऐसे वाहन थे, जिनका कोई डाटा उपलब्ध नहीं था और 59 वाहनों की फिटनेस वैधता की अवधि भी समाप्त हो गई थी। इन्होंने अपने इस अपराध से कोरोना महामारी में रातदिन लगे लोकसेवकों के सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया है।
सबूतों के मद्देनजर खारिज की जमानत
इससे पहले जमानत अर्जी पर बहस करते हुए बचाव पक्ष का कहना था कि लल्लू की इस मामले में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है। उन्हें महज राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है। विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों के बाद मामले की गंभीरता व अभियुक्त लल्लू के खिलाफ अब तक की विवेचना में एकत्रित सबूतों के मद्देनजर उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।

