मुंबई: लॉकडाउन के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों को वापस उनके राज्यों तक पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार और मंगलवार से राज्य के अलग-अलग शहरों में मजदूरों की भारी भीड़ प्राइवेट क्लिनिक के सामने फिटनेस सर्टिफिकेट लेने के लिए उमड़ी है। इसके अलावा भीड़ पुलिस स्टेशनों पर भी नजर आ रही है। क्योंकि, फिटनेस सर्टिफिकेट लेने के बाद मजदूरों को पुलिस स्टेशन या जिला मुख्यालय पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसके बाद ही वे ट्रेन या बस से अपने राज्यों तक जा सकते हैं। मुंबई में करीब 7 लाख से अधिक लोग हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों में जाना है। एक बार सर्टिफिकेट जारी करने के बाद कितने दिन तक उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पर भी क्लियरिटी नहीं है।
फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए 500 रुपए वसूलने का आरोप
घर वापसी के लिए लगने वाले दस्तावेजों में हेल्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी क्लिनिक के सामने प्रवासी मजदूरों की कतार लगी हुई है। कुछ लोग मौके का फायदा उठा 500 रुपए तक सर्टिफिकेट के लिए शुल्क ले रहे हैं। ऐसे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने महाराष्ट्र के डॉक्टरों से अपील की है कि 100 से अधिक शुल्क हेल्थ सर्टिफिकेट के लिए न लिया जाए।
10 मिनट में एक सर्टिफिकेट
डॉक्टरों के अनुसार, सही तरीके से सर्टिफिकेट जारी करने में एक व्यक्ति पर 10 मिनट लग रहा। पहले उनका बॉडी टेम्प्रेचर लिया जाता है। फिर सर्दी-जुकाम या बुखार की हिस्ट्री ली जाती है, उसके बाद ही सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
जानकारी का अभाव बनी मजदूरों की सबसे बड़ी चुनौती
धारावी में रहने वाले राधेश्याम मिश्रा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले हैं। वे एक पाइप बनाने वाली कंपनी में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद से उनके ठेकेदार ने भी उनकी मदद नहीं की और अब वे पूरे परिवार के साथ वापस उत्तर प्रदेश जाना चाह रहे हैं। शुरू के दो दिनों में उन्हें पता ही नहीं चला कि लॉकडाउन में घर लौटने की क्या प्रक्रिया है। कुछ स्थानीय लोगों ने पूरी प्रक्रिया समझाई तो पूरे दिन खड़े रहने के बाद मंगलवार शाम को उन्हें डॉक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट मिला है। अब उनके सामने एक और चुनौती है धारावी पुलिसस्टेशन से घर जाने का पास लेने की। राधेश्याम की तरह ही कई हजार मजदूर अभी भी मुंबई में फंसे हुए हैं।

