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Reading: पाकिस्तान परम्परागत युद्ध नहीं जीत सकता : राजनाथ सिंह
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पाकिस्तान परम्परागत युद्ध नहीं जीत सकता : राजनाथ सिंह

Last updated: November 30, 2019 11:04 am
Surabhi Saloni
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7 Min Read
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नई दिल्ली:रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को एनडीए के 137वें कोर्स की पासिंग आउट परेड का रिव्यू करते हुए कहा कि मुझे खुशी हो रही है। मैं आज भारत की डिफेंस फोर्स की गौरवशाली परम्परा में एक नई कड़ी को जुड़ते हुए अपनी आंखों के सामने देख रहा हूं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए देश की भविष्य की सेना के लीडरशिप से से रूबरू होना एक सुखद अनुभूति है। आज का यह दिन 137वें कोर्स को पूरा करने वाले कैडेट का दिन है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के रूप छद्म युद्ध (Proxy War‍) का रास्ता चुना है मगर आज मैं इस बात को पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि इस छद्म युद्ध में भी पाकिस्तान को शिकस्त के अलावा कुछ हाथ नही लगेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की मारक क्षमता का सबसे बड़ा श्रेय किसी किसी को जाता है तो भारतीय सेना को जाता है। CAPFs और हमारे पुलिस फोर्स को जाता है जिन्होंने इस प्रोडेक्टिड वॉर में भी नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण की 10 खास बातें
1- दुनिया का इतिहास हमें यह बताता और सिखाता है कि जो देश सुरक्षा से जुड़े गतिशील जोखिम और चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार नहीं करतें, वे खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम करते है। इसलिए जहां हमें बीसवीं शताब्दी में पैदा हुए और फले फूले आतंकवाद से निपटने के लिए खुद को तैयार रखना है, वहीं इक्कीसवीं शताब्दी के नये खतरों का भी मुकाबला करना हैं जिनमें साइबर खतरे और नफरत से भरी विचारधाराओं के विस्तार का मुकाबला करना शामिल है।

2- भारत ही नही पूरी दुनिया ने यह महसूस किया है कि जब भी मानवीय संकट हुआ है या ग्लोबल पीस और स्थिरता के लिए कोई खतरा पैदा हुआ है तो भारतीय सेनाओं ने जिस व्यावसायिकता का परिचय दिया है वह अपने आप में बेमिसाल है।

3- देश की सुरक्षा के लिए अब भारत की सेना सीमाओं के भीतर ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर सीमा के पार जाकर भी कार्रवाई करती है। हमने पिछले साढ़े पांच सालों में तीन-चार अवसरों पर दिया है। 2016 में पीओके में सर्जिकल स्ट्राईक हुई और 2019 में हमने बालाकोट में आतंकी ठिकाने नष्ट किए।

4-आज के दिन एक आम आदमी के रूप में में आप ‘अन्तिम पग’ उठायेंगे क्योंकि आज के बाद आपकी पहचान देश के मान, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा करने वाले ‘सैनिक’ के रूप में की जायेगी। इसलिए यह अवसर आपके लिए उन क्षणों को फिर से याद करने का है, जो एक कैडिट के रूप में एनडीए कैंपस में आपने बिताये है। याद करें उन पलों को जिनको यहां जीकर आपने अपनी शारीरिक, मानसिक और नैतिक शक्ति की नई बुलन्दियों को छुआ है।

5- हमारे देश के सैनिकों ने अपने खून-पसीनें से इस भारत की रक्षा की है। इसलिए आज का यह अवसर उन सभी सैनिकों को भी याद करने का है जिन्होंने इस देश में अपनी सेवा, त्याग और बलिदान से भारत में एक पराक्रमी सैन्य परम्परा का निर्माण किया है।

6- इसलिए जब आप इस परम्परा से जुड़ रहे हैं तो आपको इसका पूरे मनोयोग से अनुकरण और अनुसरण करना है। जो ट्रेनिंग आपने एनडीए में हासिल की है, उसने केवल आपको मजबूत ही नहीं किया है बल्कि आपकी जिन्दगी को नये मायने भी दिए है। मैं आज के इस मौके पर भारत के नागरिकों का ध्यान भी आपकी तरफ खींचना चाहूंगा, क्योंकि आपने इस देश की रक्षा परम्परा से जुड़कर अपने भारतीय होने का सच्चा फर्ज निभाया है। सच्चे और अच्छे भारतीय होने का अर्थ है देश सेवा को अपना फर्ज समझना और अपना फर्ज पूरी जिम्मेदारी से निभाना।

7- आपने देश सेवा को अपना फर्ज ऐसे समय में समझा है जब ज्यादातर नई पीढ़ी पैसा, शोहरत और दूसरे तरह के आकर्षण के पीछे भाग रही है। आपने अपनी जिंदगी में लोभ की जगह आत्म अनुशासन चुना है।

8- यह कोई संयोग नहीं है कि एनडीए का सूत्र वाक्य ‘सेवा परमो धर्मः’ है, क्योंकि सेना और सेवा के गठजोड़ के बिना सेना कभी सम्मान की अधिकारी नहीं हो सकती। जब आज के युग में कई संस्थानों अपनी साख बचाने में लगी हुई है, भारतीय सेना एक ऐसी संस्थानों है, जो अपनी साख बढ़ाने में लगी हुई है। भारत ने हमेशा से सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण (Peaceful) तथा सौहादपूर्ण (friendly) संबंध बनाने में विश्वास रखा है। हमारे कोई अतिरिक्त क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं, न ही हम किसी अन्य देश के मामलों में दखल देते हैं। मगर जब हमारे देश को कोई छेड़ेगा तो हम उसे छोड़ेंगे नहीं।

9- हम अपनी क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता तथा लोगों की सुरक्षा के लिए हमेशा मुस्तैद तथा तत्पर हैं। इसलिए जब कोई देश अपनी धरती पर आतंकवादी कैंप चलाता है, या भारत पर हमला करने की साजिश रचता है तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है।

10- देश की सुरक्षा के लिए अब भारत की सेना सीमाओं के भीतर ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर सीमा के पार जाकर भी कार्रवाई करती है। हमने पिछले साढ़े पांच सालों में तीन-चार अवसरों पर दिया है। 2016 में पीओके में सर्जिकल स्ट्राईक हुई और 2019 में हमने बालाकोट में आतंकी ठिकाने नष्ट किए।

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