निर्देशकः सनोज मिश्रा
कलाकारः रॉबिन सोही, रितम भारद्वाज, रतन राठौड़, मनोज बख्शी, लारिसा चक्ज, निशा श्रीवास्तव।
आज यानि 15 नवंबर को रिलीज हुई फिल्म ‘लफंगे नवाब’ बाप बेटे और कुछ दोस्तों पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन सनोज मिश्रा ने किया है। फिल्म बाप-बेटे के प्यार के साथ ही झूठी दस्ती को भी बयान करती है। गुलशन आनंद फ़िल्म्स के तले बनी ‘लफ़ंगे नवाब’ एक सस्पेंस ड्रामा फ़िल्म है, जिसकी शूटिंग मुम्बई और लखनऊ के ख़ूबसूरत लोकेशन्स पर की गयी है।
कहानीः फिल्म ‘लफंगे नवाब’ एक बिजनेसमैन (मनोज बख्शी) बाप और बेटे युग (राबिन सोही) व उसके दोस्तों की कहानी है, युग को म्युजिक में दिलचस्पी है वह अपने कुछ दोस्तों के साथ हमेशा म्युजिक की प्रैक्टिस और उसकी तैयारियों में लगा रहता है जबकि पिता एक बड़े बिजनेसमैन हैं और चाहते हैं कि बेटा उनके बिजनेस में हाथ बंटाए और उसे संभाले। लेकिन युग दोस्तों और म्युजिक में इतना मशगूल है कि वह पिता की बातों पर ध्यान ही नहीं देता। इन दोस्तों में एक दोस्त जो खाने का शौकीन दूसरा मौज, मस्ती में मशगूल रहने वाला है। हर लड़की को देखकर उस पर विशेष ध्यान देने लगता है जबकि एक लड़की (रितम भारद्वाज) जो युग के प्यार में पड़ जाती है लेकिन युग अपना ध्यान म्युजिक पर ही लगाना चाहता था। जबकि बाकी दोस्त सामान्य दोस्तों की तरह हैं। इस बीच उनके पारिवारिक दोस्त की बेटी एमी (लारिसा चक्ज) अमेरिका से इंडिया आ जाती है, जिसके मां-बाप की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। वह इन्हीं के पास रहती है। साथ ही युग के साथ म्युजिक की प्रैक्टिस करने लग जाती है। पिता फिर युग से कहते हैं कि बेटा यह दोस्ती और म्युजिक आपके किसी काम की नहीं है, तभी तक है जब तक आपके पास पैसा है इसलिए बिजनेस पर ध्यान दो। तमाम कोशिशों के बाद जब बेटा बिजनेस पर ध्यान नहीं देता तो पिता उसे इसका एहसास दिलाने के लिए एक नाटक करते हैं। लेकिन यह नाटक उन्हें भारी पड़ता है, क्योंकि जिस एमी की अपने हाथों बिजनेस पिता मौत का नाटक करते हैं उसकी असली में किसी ने हत्या कर दी और वह इस केस में फंस जाते हैं। युग बहुत परेशान हो जाता है, इसमें उसके दोस्त भी उसकी मदद नहीं करते हैं। उसका शक अपनी गर्लफ्रेंड पर जाता है जो उससे प्यार करती है क्योंकि जब एमी आती है तो वह युग करीब जाने लगती है जिससे जो उसकी गर्लफ्रेंड को बुरा लगता है और वह नाराज रहती है। लेकिन वह युग को बताती है कि मैंने एमी का कत्ल नहीं किया है, हां मुझे उसका तुम्हारे करीब आना बुरा लगता था लेकिन मैं ऐसी भी नहीं हूं कि इसके लिए उसका कत्ल कर दूं। युग के पिता जेल में हैं और वह तभी छूट सकते हैं जब एमी के असली कातिल का पता चल सके। आगे क्या होता है, एमी का कत्ल किसने और क्यों किया? युग पिता को छुड़ा पाता है कि नहीं? इसका पर्दाफाश होता है कि नहीं, यह सब जानने के लिए एक बार फिल्म देखें।
निर्देशनः निर्देशक सनोज मिश्रा इससे पहले भी कई फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं लेकिन यह फिल्म बाकी फिल्मों से कमजोर नजर आ रही है, क्या कारण यह वही बता सकते हैं। फिल्मों को और भी बेहतर बनाया जा सकता था, जिसमें सनोज मिश्रा कामयाब नहीं हुए हैं।
एक्टिंगः लीड रोल में रॉबिन सोही कोई कमाल नहीं कर पाए हैं जबकि युग की प्रेमिका के रोल में रितम भारद्वाज ठीक रही हैं और अमेरिका से आई एमी की भूमिका में लॉरिसा का भी किरदार ठीक ठाक है। रतन राठौड़ ने काफी ओवर एक्टिंग कर दी है। बिजनेसमैन के रोल में मनोज बख्सी सामान्य हैं। बाकी कलाकार भी कुछ खास नहीं कर पाए हैं।
फिल्म का म्युजिक भी अपना छाप छोड़ने में नाकाम रही है।
सुरभि सलोनी की तरफ से फिल्म को 2.5 स्टार।
- दिनेश कुमार (dinesh@surabhisaloni.com)

