डोंबिवली। तेरापंथ धर्म संघ के सरताज आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी के सन्निध्य में कन्या मंडल के कार्यशाला का आयोजन हुआ- सॉरी महकाएं जीवन की क्यारी: कन्फेस एंड डिस्ट्रेस। कार्यशाला का शुभारंभ नमस्कार महामंत्रोच्चरण से हुआ। कन्याओं ने महाप्रज्ञ अष्टकम से मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। सहप्रभारी कविता संचेती ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यशाला का मूल उद्देश्य बताया।
साध्वी श्री जी ने मंगल उद्बोधन देते हुए कहा – जीवन का सुख क्षमा में छिपा है। उस सुख को हम शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्ति नहीं दे सकते बल्कि अनुभव कर सकते है। इसलिए प्राणीमात्र के साथ मैत्री का व्यवहार होना चाहिए। आपने कन्याओं को संबोधित करते हुए यह भी कहा यदि आप अपने भावी जीवन को खुशहाल बनाना चाहते हो तो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मुस्कुराना सीखना होगा किसीके द्वारा गलती बताई जाए तो सहज स्वीकार करना सीखना होगा।
आपने दुखद परिस्थितियों में मन को संतुलित करने के लिए “ये क्षण भी बीत जाएंगे” इस सूत्र को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। साध्वी श्री शकुन्तलाकुमारी जी, संचितयशा जी, जागृतप्रभाजी और रक्षितयशा जी की भी उपस्थिति रही।
प्रो. पल्लवी शाह ने कंफेशन और स्ट्रेस मेनेजमेंट पर अपने विचार प्रश्नोत्तर शैली में व्यक्त किए। कन्याओं ने कन्फेशन रूम में गुरुदेव की तस्वीर के समक्ष अपनी गलतियां कन्फेस की। महिला मंडल संयोजिका मधुजी कोठारी की उपस्थिति रही। आभार ज्ञापन प्रभारी ममता सिंघवी ने किया। कार्यशाला का कुशल संचालन सहप्रभारी कविता संचेती ने किया।
सॉरी महकाएं जीवन की क्यारी: कन्फेस एंड डिस्ट्रेस – शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी

