अमृतवाणी अधिवेशन के आयोजन में कई गणमान्य व्यक्ति पूज्य सन्निधि में उपस्थित
28-09-2019 शनिवार , कुम्बलगोडु, बेंगलुरु, कर्नाटक। तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने मंगल पाथेय में फरमाया कि आदमी का व्यवहार धर्म युक्त होना चाहिए। व्यवहार को सादे पानी की तरह बताते हुए कहा कि अगर इसमें मीठापन आ जाए तो यह सद्व्यवहार के रूप में जाना जाता है। व्यवहार में सादगी, सौम्यता और कल्याण की भावना रहे तो यह मंगलमय हो जाता है व्यवहार में कटुता, वैमनस्य और आक्रोश जैसी भावना रहे तो अहितकारी बन जाता है।
अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तृतीय दिन अणुव्रत प्रेरणा दिवस के उपलक्ष में फरमाते हुए कहा कि व्यक्ति के जीवन में संयममय नियम अवश्य रहने चाहिए। छोटे-छोटे नियमों से बना अणुव्रत अगर व्यक्ति जीवन में धारण कर ले तो वह सत्पथ पर आगे बढ़ सकता है। नियम चाहे छोटा हो अगर उसका पालन सही रूप से किया जाए तो वह बड़ा फल देने वाला हो सकता है। आचार्य प्रवर ने एक कथानक के माध्यम से फरमाया कि एक बुरी आदत छोड़ने से अनेक बुरी आदतों का परिष्कार हो जाता है और सही रास्ता मिल जाता है। इससे स्वयं के साथ औरों का भी कल्याण किया जा सकता है। गृहस्थ महाव्रती नहीं सकता, परंतु अणुव्रत के माध्यम से जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
अमृतवाणी के राष्ट्रीय अधिवेशन के संबंध में आचार्य प्रवर ने फरमाते हुए कहा कि यह धर्म संघ की ऐसी संस्था है जो अनेक रूपों में लाभकारी है। इसके द्वारा संचित किए गए प्रवचनों से अनेक साक्ष्य मिल जाते हैं। संघीय गतिविधियों के पूर्व आचार्यों के द्वारा कही गई बातें प्रमाण के रूप में स्पष्ट हो जाती है। अमृतवाणी शब्द के विषय में फरमाते हुए कहा कि वाणी के साथ अमृत का योग होना इसे चिरकालिक बना देता है। इसके द्वारा लोगों का कल्याण हो सकता है। अमृतवाणी द्वारा आयोजित संगीत प्रतियोगिता के विषय में फरमाते हुए कहा कि प्रतिभा को निखरने का मौका मिलना संघ के लिए अच्छी बात है और इससे उनका भी आध्यात्मिक विकास भी हो सकता है। अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री प्रकाश बैद ने संस्था की गतिविधियों को पेश करते हुए कहा कि 40 वर्षों से अमृतवाणी आचार्यों के प्रवचन, विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा दिए गए उद्बोधन एवं सभी संघीय संस्थाओं के कार्यक्रमों को डिजिटल के रूप में संग्रह करती आ रही है।श्री जैसराज जी सेखानी एवं सुखराज जी सेठिया के द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में महाप्रज्ञ जी के 101 विशिष्ट व्याख्यानों की श्रृंखला जारी करने की बात भी रखी। श्री सुखराज जी सेठिया ने भी अमृतवाणी के संबंध में अपने विचाराभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम में सुजानगढ़ से विधायक मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने आचार्य प्रवर से आशीर्वाद ग्रहण कर अपने क्षेत्र में पधारने का पुरजोर निवेदन किया। कर्नाटक विधान परिषद सदस्य लहरसिंह सिरोहिया ने आचार्य प्रवर के समक्ष अपनी भावनाएं प्रकट कर आशीर्वाद ग्रहण किया और जैन एकता के विषय में आचार्य प्रवर द्वारा संवत्सरी के विषय में की गई घोषणा को अद्भुत बताया। गोपालपुरा की सरपंच श्रीमती सविता राठी ने भी अपने उद्गार व्यक्त कर आशीर्वाद ग्रहण किया। कुशल संचालन मुनि श्री दिनेश कुमारजी ने किया।
दोपहर में अमृतवाणी स्वरसंगम प्रतियोगिता 2019 का अंतिम चरण आयोजित हुआ जिसमें अलग-अलग जगह से 13 प्रतियोगियों ने अपनी अपनी प्रस्तुति दी। स्वरसंगम प्रतियोगिता 2019 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पूजा बैद सूरतगढ़ एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली प्रियंका छाजेड़ गंगाशहर एवं पूजा चौरडिया, कटक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। जयपुर से समागत श्री केसी मालू, तेजपुर से समागत श्री कमल संचेती तथा मुंबई से समागत श्रीमती मीनाक्षी भूतोड़िया ने निर्णय का क्रम दायित्व निभाया।

