मुम्बई। कालबादेवी में शासन श्री साध्वी कैलाशवती जी के सानिध्य में वाणी संयम दिवस का मंगलाचरण दादर की बहनों के द्वारा किया गया। “संयम वाणी को”गीतिका साध्वी ललिता श्री जी एवं साध्वी सम्यक्तव यशा जी नेप्रस्तुत की। साध्वी शारदा प्रभा जी ने आगमवाणी ज्ञाता धर्म कथा सूत्र का वाचन करते हुए कहा -मनुष्य जन्म अनमोल है हमें भाग्य योग से यह मनुष्य रतन हाथ में आया है संयम की करें खरी कमाई नाग श्री के जीवन पर प्रकाश डाला। साध्वी पंकज श्री जी ने वाणी संयम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा वाणी का संयम ही जीवन है ,साधना है ।
साध्वी श्री जी ने कहा बोलने की भी कला है कैसे कहां कब कितना बोला जाए। ऐसे माना जाता है कि 24 घंटे में एक शब्द तो हर व्यक्ति का फलता है इसीलिए सोचकर शुभ शुद्ध वाणी का प्रयोग करना चाहिए । यह लाली बाई ही कर्म बंधन मे अहम भूमिका निभाती है । बोलना है तो हित, मित, मधुर बोले यह लाली बाई ही कभी घोड़े पर और कभी गधे पर बैठा देती है । इसलिए वाणी का संयम जरूरी है कि कम बोले प्रसंग देख कर बोले व्यवहार भाषा बोले सत्य बोले लेकिन कटु सत्य ने बोले जिससे किसी के प्राण चले जाए ऐसी स्थिति में मौन रहना श्रेयस्कर रहता है। आचार्य डालगणी के समय मुनीआनंदघण जी की घटना सुनाते हुए कहा संतो को वचन सिद्धि थी लेकिन अभीशाप रूप में कभी वचन सीध्दि का प्रयोग नहीं करना चाहिए । वाणी का संयम सब सुखों की खान है।
शासन श्री साध्वी कैलाशवती जी ने जन समूह को संबोधित करते हुए कहा भगवान का जीव अठारहवे भव मैं त्रिपृष्ट रूप में उत्पन्न होता है । वासुदेव का शासन कठोर होता है उनके राज्य मे एक बार संगीतमय मंडली पहुंची वासुदेव ने शय्यापालक को कुछ देर के लिए संगीत बंद करने की आज्ञा दी लेकिन संगीत रस में डूबा शय्यापालक भूल जाता है। इसी गलती पर वासुदेव उसके कानों में गर्म शीसा डालने का आदेश देते हैं ऐसी क्रूरता से भगवान महावीर के जीवन में भयंकर असातावेदनीय कर्म का बंद किया।
दक्षिण मुंबई तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पवन जी बोलिया ने सभी भाई बहनों को सूचनाओं के द्वारा मोटिवेट किया। और आगम स्वाध्याय के वचन को सुनने के लिए प्रेरित किया। धारावी, मटुंगा, वडाला से श्रावक श्राविका बस के द्वारा प्रवचन का रसपान कर रहे हैं ।कोलीवाड़ा का श्रावक समाज बस की व्यवस्था से कालबादेवी में पर्युषण पर्व का लाभ ले रहा है।
“वाणी संयम, सब सुखों की खान”, कालबादेवी में पर्युषण महापर्व की धूम

