डोंबिवली। महातपस्वी रत्न आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी के सान्निध्य में डोंबिवली में पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण का शुभारम्भ नमस्कार महामंत्र के जप से हुआ। कन्या मंडल ने वीतराग प्रभु महावीर का अर्चना सुमधुर मंगल गीत से की।
शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी ने ओजस्वी वाणी में कहा -अध्यात्म के आलोक से स्वयं को आलोकित करने का पर्व है- पार्युषण। यह नया उल्लास, नई उमंग और नई प्रेरणा लेकर आता है। इन दिनों में प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य रहता है कि जीवन में सद्-विचार, सदाचार की ज्योति जलाएं। आपने चंदनबाला के तेले की प्रेरणा देते हुए कहा- पार्युषण में तप जप स्वाध्याय से अमृत रस का पान करे। साध्वी श्री जी की प्रेरणा से भाई बहिनों ने केंद्र द्वारा निर्दिष्ट पर्यूषण आचार संहिता को स्वीकार किया। साध्वीश्री जी ने खाद्य संयम के प्रसंग में कहा- मन को पवित्र, निर्मल बनाने के लिए, भोग से त्याग की ओर प्रस्थान करने के लिए सात्विक आहार करना जरूरी है क्योंकि सात्विक आहार पॉजिटिव विचारों का संवाहक है।
साध्वी श्री रक्षितयशा जी ने अपने विचार प्रस्तुत किये। साध्वी श्री शकुन्तलाकुमारी जी ने, जागृतप्रभाजी ने गीत के माध्यम से पर्युषण में क्या करना है इसके बारेमें जानकारी दी। महिला मंडल ने जुड़वा बहनों की त्याग तपस्या पर नाटिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन साध्वी श्री संचितयशा जी ने किया। कन्या मंडल संयोजिका प्रेक्षा बड़ाला, सह संयोजिका रिंपल सिंघवी व आशी सिंघवी, किंजल डांगी, एकता धोका, मीती बाफना, आरती बाफना, सेजल कोठारी, मेहेक हीरावत, पूर्वी हीरावत, आरती बाफना, प्रेक्षा चंडालिया, हर्षिता बाफना, दिव्या सोनी, सेजल धाकड़, दिव्या गुंदेचा, प्रेक्षा चंडालिया ने सुबह-शाम गीतिका प्रस्तुत की। कन्या मंडल की हनी हिंगड़, भाविका डागलिया व जीनाल टुक्लिया ने खाद्य संयम पर नाटिका प्रस्तुत की।
सदाचार की ज्योति जलाने का पर्व है पर्युषणः शासन श्री साध्वी श्री सोमलता जी

