अपनी ढेर सारी खूबियों के कारण नीम आयुर्वेद में अपनी अलग पहचान रखता है। स्वाद से कड़वा होने के बावजूद नीम औषधीय गुणों के कारण अपना खास महत्व रखता है। इसके ऐसे अनेक लाभों के बारे में बता रहे हैं वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय ‘हरीश’
बिच्छू, बर्र या अन्य विषैले कीटों के काट लेने पर तेज दर्द तो होता ही है, कई बार वह तेजी से फैलता भी है। ऐसी स्थिति से राहत पाने के लिए हर जगह मौजूद नीम के पत्तों को पीसकर इसका लेप प्रभावित अंग पर लगाएं। इससे दर्द में तो तत्काल लाभ होगा ही, जहर भी नहीं फैलेगा।
किसी भी तरह का घाव हो जाए, तो आप परेशान हो जाते हैं। ऐसे में नीम के पत्तों के लाभ के बारे में जानना बहुत जरूरी है। नीम के पत्तों को पीसकर उसका लेप घाव पर लगाएं। अगर घाव पुराना हो गया है, तो जैतून के तेल के साथ इसके पत्तों को पीसकर इसका लेप घाव पर लगाएं, लाभ होगा।
अगर आप दाद, खाज, खुजली की समस्या से परेशान हैं, तो इससे छुटकारा पाने के लिए नीम की पत्तियों को दही के साथ पीसकर लगाना फायदेमंद साबित होगा।
अगर मलेरिया बुखार हो जाए, तो नीम का काढ़ा काफी फायदेमंद साबित होता है। इसके लिए नीम की ताजा छाल को उबालकर काढ़ा बना लें। दो से तीन चम्मच काढ़ा दिन में दो से तीन बार पिएं, बुखार से मुक्ति मिलेगी।
आप खांसी, बवासीर, पेट में कीड़ों की समस्या से पीड़ित हैं, तो नीम की टहनी का डंठल चबाना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
सिर दर्द, दांत दर्द, हाथ-पैरों के दर्द और सीने के दर्द में नीम के तेल से लाभ होता है। इसके लिए प्रभावित जगह पर नीम के तेल से धीरे-धीरे मालिश करनी चाहिए।
मलेरिया से राहत दिलाए नीम का काढ़ा, इसके ये फायदे भी जानें

