सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: आगमोद्धारक सागरानंदसागर सूरीश्वरजी म. सा. की 145वीं जन्मतिथि’ के उपलक्ष में ठाकुरद्वार में गुणानुवाद
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

आगमोद्धारक सागरानंदसागर सूरीश्वरजी म. सा. की 145वीं जन्मतिथि’ के उपलक्ष में ठाकुरद्वार में गुणानुवाद

Last updated: August 1, 2019 8:02 pm
Surabhi Saloni
Share
8 Min Read
SHARE

मुंबई। आ. रविशेखरसूरीश्वरजी म. सा. की निश्रा में ठाकुरद्वार, नेमानी वाड़ी के प्रांगण में आज प्रवचन में ललितशेखरविजयजी म. सा. ने ‘समवसरण’ की व्याख्या की और ‘आगमोद्धारक सागरानंदसागर सूरीश्वरजी म. सा. की 145वीं जन्मतिथि’ के उपलक्ष में गुणानुवाद किये गए।
प्रभु को केवलज्ञान होने के बाद देवता समवसरण की रचना करते हैं जहाँ प्रभु देशना देते हैं, 20000 सीढ़ियों वाले समवसरण में पहुचने के लिए 10000 सीढियां चढ़ने के बाद पहला गढ़ आता हैं जहां देवताओं के विमानों की पार्किंग होती हैं, फिर 5000 सीढ़ियों के बाद दूसरा गढ़ जहां तिर्यंच बैठते हैं, तिर्यंचों की 9 पर्षदा होती हैं, जलचर, थलचर और खेचर और तीनों के 3 प्रकार नर, मादा और नपुंसक, और फिर 5000 सीढ़ियों के बाद सबसे ऊपर तीसरा गढ़ आता हैं जहां साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका, 4 तरह के देवों और 4 तरह की उनकी देवियों ऐसे 12 पर्षदा होती हैं। हम पहली सीढ़ी चढ़ने का पुरुषार्थ करते हैं फिर अरिहंत के प्रभाव से ऊपर कब पहुच जाते हैं पता ही नहीं चलता, अरिहंत का मुख्य कार्य मार्ग की प्ररूपणा करना हैं, स्थविर उसका परिपालन करते हैं और हमें उस पर चलना हैं। देव दुंदुभी जो भगवान के 8 प्रातिहार्य में से 1 होती हैं, वो जगह जगह जाकर प्रचार करती हैं के प्रमाद छोड़ो और समवसरण में देशना सुनने पहुँचो। समवसरण में सबको प्रवेश हैं, पर भगवान के शासन में अभवि और मिथ्यात्वी का प्रवेश नहीं हैं, देशना से सिर्फ भवि जीवों का संदेह दूर होता हैं और उनका कल्याण होता हैं।
समवसरण में 363 पाखंडी और 363 मिथ्यात्वी देशना सुनने आते हैं और सबसे पहले आकर सबसे आगे बैठते हैं, और इसलिए आते हैं कि भगवान का कंठ और वाणी बहुत मधुर, सुरीली और संगीतमय होती हैं और भगवान की चूक पकड़ने आते हैं ताकि गलती पकड़कर चारों दिशाओं में बातें फैला दे, फिर उतरते वक़्त देशना की चर्चा करते हैं कि बोलने में माहिर हैं पर जो बोला वो सब झूठ हैं। भगवान की देशना पुस्कुरावर्त मेघ की तरह बरसती हैं, वो मेघ जो हजारों सालों से बंजर पड़ी भूमि में लगातार 7 दिन तक ऐसे बरसते हैं के अगले 10 हज़ार वर्षों तक भूमि को उपजाऊ बना देती हैं। मृगसेलिया पत्तर इतना चिकना होता हैं के उसके ऊपर कुछ भी टिकता नहीं हैं, ठीक वैसे ही भगवान की देशना का भी हम पर कोई असर नहीं होता। समवसरण में 6 ऋतुएं एक साथ प्रकट होती हैं, घुटनों तक कोमल पुष्प होते हैं, बहुत ही मनभावन वातावरण होता हैं, समवसरण में हम किसी ना किसी भव में गए होंगे पर ऐसे मनभावन वातावरण में देशना सुनकर भी आत्मा का हित-अहित समझ नहीं सके मतलब हमारी आत्मा सो रही थी, इसलिए असर नहीं हुआ।
शास्त्रों में 2 प्रकार की निद्रा बताई हैं, 1. द्रव्य निद्रा मतलब नींद करना या सोना और भाव निद्रा मतलब अज्ञान (असमझ) और मिथ्यात्व (विपरीत समझ या गलत धारणा)। जो जागृत अवस्था में होते हैं उनके संदेह दूर होते हैं, जागृत अवस्था मतलब आत्मा के लिए जो हितकारी हैं उसे पकड़ना और जो अहितकारी हैं उसे छोड़ने की समझ।
आत्मा की 4 अवस्था बताई हैं, 1. सुसुक्ति अवस्था मतलब गहरी नींद में सो जाना, सपने नहीं आना। 2. निद्रा अवस्था मतलब जिस विकल्प या भाव में रहते हैं वैसे सपने आते हैं, 3. जागृति अवस्था मतलब मोहनीय कर्म के उदय से आंखें खुली रहती हैं पर आत्मा सोई रहती हैं और 4. उजागर अवस्था मतलब मोह से मुक्त, विकल्प रहित, आदि।
परमात्मा की शरण स्वीकारने के लिए 3 अवस्था बताई हैं, 1. अभय मतलब आध्यात्म जगत में मन की चंचलता सबसे बड़ा भय हैं, 2. अद्वेष मतलब धार्मिक क्रिया, प्रसंगों, आदि में अरुचि होना या द्वेष भाव होना, अरुचि और द्वेष खत्म होकर रुचि नहीं आती वो अद्वेष हैं, और 3. अखेद मतलब धार्मिक क्रिया, प्रवृति, आदि करते हुए कभी खेद नहीं होना, थक नहीं जाना, कंटाला नहीं आना, आदि अखेद हैं।
अंत में ये भी बताया के जिसने कभी कुछ सुकृत नहीं किया, कोई सद्गुण नहीं था, वगैरा के मरने का शोक होता हैं इसलिए उसकी ‘शोक सभा’ रखी जाती हैं, जिसने जीवनभर सिर्फ पैसा-पैसा किया, शांति से नहीं जिया, वगैरा के मरने के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए ‘प्रार्थना सभा’ रखी जाती हैं और जिसने सुकृत किया, अच्छे कार्य किये, दुनिया का भला किया, सद्गुण, आदि के मरने के बाद उसके गुणों की याद में ‘गुणानुवाद सभा’ रखी जाती हैं। भगवान की वाणी के रूप में हमारे पास हजारों आगम थे, काल के प्रभाव से आगम नष्ट होते जा रहे थे, अगर आज आगम नहीं होते तो साधु-साध्वी भगवान की वाणी हम तक कैसे पहुचाते और हमारी दुर्गति होती जाती। तीर्थंकरों ने आज तक किसी मूर्ति की प्रतिष्ठा नहीं की पर आगमों की रचना गणधर भगवंतों ने की और तीर्थंकर सुगंधि चूर्ण अपने हाथों से गणधर भगवंतों के सिर पे डालकर आगमों की प्रतिष्ठा खुद तीर्थंकर करते हैं। ऐसे नष्ट होते आगमों को बचाने के लिए सागरजी महाराज ने उनका पुनर्निर्माण यानी उद्धार किया। उस समय सभी समुदाय के कुल साधुओं की संख्या सिर्फ 19 थी, ऐसे में अलग अलग तरह से पुरुषार्थ करके आगमों के उद्धार के बाद साधुओं की संख्या बढ़ती गयी। तभी सम्मेद शिखरजी तीर्थ पर भी ब्रिटिश सरकार का बड़ा संकट मंडराने लगा, और सागरजी महाराज ने तीर्थ की रक्षा की जो आज तक सुरक्षित हैं, उनकी बदौलत ही आज हमारी ये अनमोल धरोहर बची हुई हैं और इस तरह उन्होंने आगमों के उद्धार के साथ साथ समस्त जिनशासन पे बड़ा उपकार किया।
ठाकुरद्वार संघ में चातुर्मासार्थ बिराजित सागर समुदाय की पू. सा. श्री आत्मयशाश्रीजी म. सा. की शिष्या पू. सा. श्री शासनयशाश्रीजी म. सा. का भी आज जन्मदिवस हैं, जो दोपहर में ‘आगमोद्धारक सागरानंदसागर सूरीश्वरजी म. सा.’ की जीवन चरित्र पर आधारित हाऊजी गेम के द्वारा मनाया गया, सैकड़ों बहनें इस कार्यक्रम का हिस्सा बनी। वहीं ‘ऋषभ महा-विद्या तप’ के 12वें दिन के एकासणे की व्यवस्था भी बहुत अच्छे से की गई।
किशन सिंघवी और कुणाल शाह के अनुसार ठाकुरद्वार संघ के पदाधिकारी और समर्पण ग्रुप के कार्यकर्ताओं के अलावा चांदमल सिंघवी, नरेंद्र सिंघवी, राजू सिंघवी, किशनलाल कोठारी, किशनलाल कोठारी (झिलवाड़ा), ललित सिंघवी, सुरेश सिंघवी, मनोहर सिंघवी, शांतिलाल पामेचा, कमलेश सिंघवी, गणेश सिंघवी, आदि की भी उपस्थिति रही।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article मियांदाद ने कहा- वसीम अकरम को कोच बनाओ; डिजिटल कोचिंग हमारे काम की नहीं
Next Article आजम खान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

रश्मिका मंदाना का दिखेगा नया अंदाज, 2 नवंबर को रिलीज होगा फिल्म मैसा का पहला गाना
entertainment
October 31, 2026
गौरव खन्ना और श्रद्धा आर्या के नए शो के नाम से उठा पर्दा, नवंबर के अंत में दस्तक दे सकता है ‘दिल की बेवफ़ाइयाँ’
entertainment
October 31, 2026
रहस्य, रोमांच और हॉरर से भरपूर फिल्म ‘झाड़-फूंक’ जिओ हॉटस्टार पर रिलीज, मेकर्स ने जारी किया नया ट्रेलर
entertainment
October 31, 2026
छठ पर्व पर भक्ति का नया रंग लेकर आया ‘छठी मईया बिनती हमार’, प्रियंका सिंह की आवाज में गूंजेगी आस्था
entertainment
October 31, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?