मुंबई: उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को संसद में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने का प्रस्ताव दिया। मुंबई में लोकतंत्र पुरस्कार समारोह के दौरान नायडू ने कहा कि हम देश को ‘मदर इंडिया’ कहते हैं न कि ‘फादर इंडिया’। इससे यह साबित होता है कि महिलाओं को देश में कितनी अहमियत दी जाती है। देश में उनकी आबादी 50% है। महिला प्रतिनिधियों को कार्य करने के लिए फंड और सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए।
लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव 2008 में लाया गया था। लेकिन यह 10 सालों से लंबित है। इस बार 17वीं लोकसभा में सबसे ज्यादा 78 महिला सांसद चुनी गई हैं। स्वतंत्र भारत में अब तक यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है।
नायडू ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा की तरह निकाय चुनाव भी पांच साल में कराए जाने चाहिए। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने के लिए महाराष्ट्र सरकार की तारीफ की। कई राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव देरी से कराए जाने पर उपराष्ट्रपति ने असंतोष जताया।
राज्यसभा में सदस्यों के व्यवहार से नायडू दुखी
उच्च सदन में गुरुवार को सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक को पारित करने के दौरान हुए हंगामे पर सभापति नायडू ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ”राज्यसभा में पिछले दो सालों में कुछ सदस्यों के व्यवहार से बेहद दुखी हूं। संसद नियमों के अनुसार काम करती है। वहां कामकाज नियमों, सभापति के पूर्व के फैसलों और सदस्य के लिए निर्धारित आचार संहिता के अनुसार चलता है। मुझे तब पीड़ा होती है, जब सदस्य इनका उल्लंघन करते हैं। इससे जनता की नजर में सदन की महत्ता कम होती है।”
आजम ने भाजपा सांसद को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था
नायडू का यह बयान तब आया है जब गुरुवार को लोकसभा में सपा सांसद आजम खान ने शिवहर सांसद रमा देवी को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उनके बयान की सदन में कड़ी आलोचना की गई थी। विपक्ष के नेता और लोकसभा स्पीकर इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि सपा सांसद आजम खान को सदन में माफी मांगनी चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि आजम खान को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए या उन्हें निलंबित किया जाए।
अखिलेश यादव ने आजम का बचाव किया था
सपा सांसद अखिलेश ने आजम के बयान का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अगर भाषा असंसदीय लगे तो इसे रिकॉर्ड से निकाल दें। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कुछ भी गलत भावना से कहा है। अखिलेश ने भाजपा सांसदों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इनसे ज्यादा बद्तमीज कोई नहीं हो सकता। अगर यह आजम को बद्तमीज कह रहे हैं तो यह संसद का अपमान कर रहे हैं।

