मुंबई। शासन श्री कैलाशवति जी ने उपवास बेले, तेले का प्रत्ययाख्यान कराते हुए जन मेदिनी को संबोधित करते हुए कहा- आचार्य श्री भिक्षु का 294 वां जन्म दिवस तेरापंथ के महासूर्य का जन्म दिवस है। आज के दिन स्वामी जी ने राजनगर में बोधि प्राप्त की। स्वामी जी जब भारत धड़क पर उस दिन भी मंगलवार था,तेरस थी, और जब अध्यात्मिक ज्योति सुर लोक में पहुंची उस दिन भी तेरस वे मंगलवार था। अदभूत योग था स्वामी जी के जीवन में कष्टों की आंधियों का वह महापुरुष चरेवेती चरेवेती के घोष से अनवरत बिना रुके चलते रहे। कहते हैं दुनिया का हर बच्चा जन्म के बाद रोता है पर वह जातक (भिक्षु स्वामी) हंसते-हंसते जन्मे। यौवन की 25 वर्ष की अवस्था में आपने सन्यास ग्रहण कर लिया । जैन शासन की धूरा वहन करने वाले, तेरापंथ धर्म संघ के सरताज, प्रभावक अचार्यो की पंक्त्ती में अपना नाम अंकित कर गए।
साध्वी पंकज श्री जी ने कहा-फौलादी इरादों वाले पोलादी सीने वाले महापुरुष का नाम था अचार्य श्री भिक्षु। तेरापंथ धर्म संघ का इतिहास बताता है आप मेवाड़ (राजस्थान) कंटालिया गांव में पिता बल्लूशाहा एवं माता दीपा के गोद में संवत 1783 में आएं। सिंह स्वपन के साथ जन्मे भीखण जी का जीवन सिंह की गर्जना करता है । कथनी व करनी ,निर्भय ज्योति का नाम था भीखण । भीखण जी के जीवन हर कोना पवित्र था। बाहर से देखो चाहे भीतर से। महापुरुषों के शारीरिक लक्षण कुछ ऐसे होते हैं जो उनके व्यक्तित्व की पहचान बताते है भीखण के शारीरिक लक्षणों में दोनों कानों पर बाल केश थे, जो ऊचता का बोधि करवाते हैं, उनके दाएं पग में उड़द रेखा, दाएं हाथ में मछाकार रेखा , दसों अंगुलियों में दस चक्र, ललाट पर तीन आड़ी रेखाओं के बीच तिलक रेखा ,वक्षस्थल पर छजाक्रति थी यह सब लक्षणों का फल बताया जाता है कि इन लक्षणों वाला व्यक्ति 2000 वर्ष तक विश्व ख्याति प्राप्त करता है । ऐसे महापुरुष को पाकर भारत की वसुंधरा कृत कृत्य हो गई। वंदना -वंदना अभीवंदना गीत की स्वलहरी में गाया गया “लाखों के भाग्य से भिक्षु भारत में आए।
भिक्षु भारत में आए, कलयुग में सतयुग लाए। उनके जीवन का हर पन्ना उजला- उजला था ।
साध्वी ललिता श्री जी ने अपने विचारो की अभिव्यक्ति देते हुए कहा-भीखण जी वीतराग आत्मा थी। स्वामी जी ने शुद्ध साधुत्व की परिभाषा देकर लौकिक -अलौकिक धर्म की पहचान कराई। ओत्पतिक बुद्धि के धनी थे आचार्य श्री भीखण जी साध्वी सम्यक्त्व यशा जी ।ने कहा संत भीखण जी का पूर्ण जीवन समता ,सहिष्णुता की परिक्रमा करता है। वीतराग धर्म को साधने वाले वीर भिक्षु विरले महापुरुष थे। इस प्रोग्राम का सुमधुर मंगलाचरण सुमन कावड़िया नहीं किया। दिनेश धाकड़ ,सुरेश निमचा ताराचंद बरलोटा ने गीतिका के माध्यम प्रस्तुति दी। मुंबई तेरापंथ सभा के उपाध्यक्ष गणपत जी डागलिया ने कहा बाबा भिक्षु के नाम से कंडेला मार्ग भी फूलों का राजमार्ग बन जाता है। मलूड़ से पधारे अर्जुन जी चौधरी ने साध्वी श्री के सफल चतुर्मास की मंगल कामना करते हुए वीर भिक्षु के चरणो में वंदना अर्पित की। साध्वी शारदाप्रभा जी ने प्रोग्राम संयोजन करते हुए कहा अध्यात्मिक के उतंग पुरुष का अभिनंदन , जन-जन के उपकारी वीर भिक्षु के दर्शन से सबको बोधि प्राप्त हो। महिला मंडल ने बहुत ही सुंदर गीतिका प्रस्तुत की।
बोधि दिवसः जीवन का हर पृष्ठ उजला उजला (आचार्य श्री भीखण जी) – शासनश्री साध्वी कैलाशवती जी

