आचार्य श्री तुलसी के महाप्रयाण दिवस पर दी भावांजली
चेन्नई। जैन तेरापंथ सम्प्रदाय के नवमें आचार्य श्री तुलसी का 23वाँ महाप्रयाण दिवस मुनिश्री ज्ञानेन्द्रकुमार ठाणा 3 के सान्निध्य में तेजराज पुनमिया अमजीकरै स्थित निवास स्थान पर आयोजित किया गया। शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। तेजराज पुनमिया ने स्वागत वक्तव्य तथा स्थानीय महिला मंडल सदस्यों ने गीतिका की प्रस्तुति दी।
मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार ने आचार्य तुलसी के व्यक्तित्व व कृतत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जन्म से नहीं वरन कर्म से महान बनता है, इस उक्ति को आचार्य तुलसी ने अपने पुरुषार्थ से चरितार्थ किया। उन्होंने सबको नैतिकता को जीवन का अभिन्न अंग बना लेने की प्रेरणा भी दी। मुनि विमलेश कुमार एवं मुनि विनीत कुमार ने अपनी भावांजली को स्वर दिए, तेरापंथ सभाध्यक्ष श्री विमल चिप्पड़, तेयुप अध्यक्ष श्री प्रवीण सुराणा, टीपीएफ अध्यक्ष श्री अनिल लुणावत, जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा उपाध्यक्ष ज्ञानचन्द आंचलिया ने अपने वक्तव्यों के माध्यम से महामानव को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।संचालन संजय भंसाली एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश कावड़िया ने किया। कार्यक्रम का आयोजन अमजीकरै, अरुम्बाक्कम, शेनॉय नगर एवं चूलैमेडु के तेरापंथ समाज द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस अवसर पर रात्रिकालीन धम्मजागरण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें मुनि ज्ञानेंद्रकुमार, मुनिवृन्द एवं जय तुलसी संगीत मंडल से अरिहंत दूधोडिया ने भक्ति गीतों से संघ व आराध्य के प्रति श्रद्धा समर्पित की। यह आचार्य श्री महाश्रमण चातुर्मास व्यवस्था समिति के जानकारी प्रचार – प्रसार विभागाध्यक्ष स्वरूप चन्द दाँती ने दी।
मनुष्य जन्म से नहीं अपितु कर्म से बनता महान : मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार

