ब्रिस्टल:आईसीसी ने महेंद्र सिंह धोनी को वर्ल्ड कप के मुकाबलों में ‘बलिदान बैज’ लगे हुए ग्लव्स पहनकर खेलने की इजाजत नहीं दी। आईसीसी ने कहा कि नियमों के मुताबिक, खिलाड़ी के कपड़ों या उनके खेल के सामनों पर कोई भी व्यक्तिगत संदेश या लोगो लगाने की इजाजत नहीं है। इसमें विकेटकीपर के ग्लव्स भी शामिल हैं। इन पर भी यही शर्तें लागू होती हैं।
बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में धोनी जो ग्लव्स पहनकर विकेटकीपिंग करने उतरे थे, उस पर ‘बलिदान बैज’ का चिह्न लगा था। गुरुवार को इंटननेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने इस पर आपत्ति जताई थी। उसने बीसीसीआई से धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स से ‘बलिदान बैज’ या पैरा स्पेशल फोर्स के रेजिमेंटल निशान को हटाने के लिए कहा था। शुक्रवार को बीसीसीआई ने आईसीसी को पत्र लिखकर धोनी को ‘बलिदान बैज’ लगे ग्लव्स पहनकर विकेटकीपिंग करने की इजाजत देने की मांग की थी।
धोनी के सैनिकों को समर्थन करने से पाकिस्तान को समस्या
बीसीसीआई के अलावा धोनी को सेना और सरकार का भी साथ मिला है। लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विनोद भाटिया ने कहा, धोनी को पूर्व-डीजीएमओ की मौजूदगी में प्रादेशिक सेना की पैराशूट रेजीमेंट में कमीशन किया गया था। भाटिया ने कहा कि धोनी के अपने ग्लव्स पर ‘बलिदान बैज’ का चिन्ह लगाने के मामले को ज्यादा तूल दिया जा रहा है। वह राजनीतिक, धार्मिक और कमर्शियल के उद्देश्य के लिए नहीं किया गया। कई खिलाड़ी हैं जो ऐसा करते हैं। धोनी सैनिकों का समर्थन कर रहे हैं। सेना के जवानों को यह देखकर अच्छा लगेगा कि उनके जैसा आदमी उनकी सराहना कर रहा है।’
भाटिया ने कहा, ‘खिलाड़ियों, क्रिकेटर्स और पाकिस्तान टीम के कई ऐसे किस्से मौजूद हैं, जब उन्होंने सेना को सम्मान दिया। लॉर्ड्स में 2016 में पाकिस्तानी टीम ने अपनी जीत को सेना को समर्पित किया था। धोनी के बैज पहनने से पाकिस्तान, भारत के भीतर के कुछ लोगों और आईसीसी को समस्या होती है।’
आईसीसी से इस मामले में बात करे बीसीसीआई : केंद्रीय खेल मंत्री
केंद्रीय खेल मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार खेल संस्थाओं के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती है। वे स्वायत्त संस्थाएं हैं। लेकिन जब मुद्दा देश की भावनाओं से जुड़ा होता है तब राष्ट्रहित ध्यान में रखना होता है। मेरा आग्रह है कि बीसीसीआई इस मामले को आईसीसी के सामने उठाए।
‘एक लोगो नियम’ का हवाला दे रही आईसीसी
आईसीसी धोनी के ग्लव्स पर आपत्ति जताने के पीछे अपने ‘एक लोगो नियम’ का हवाला दे रही है। आईसीसी के नियमों के मुताबिक विकेटकीपिंग ग्लव्स पर सिर्फ एक स्पान्सर का लोगो ही लगाया जा सकता है। धोनी के मामले में, उनके ग्लव्स पर पहले से ही एसजी का लोगो लगा हुआ है। ऐसे में ‘बलिदान बैज’ लगाने की मंजूरी देना इंक्विपमेंट स्पान्सरशिप का उल्लंघन होगा।
बीसीसीआई को टेक्निकल कमेटी को समझाना होगा
अब बीसीसीआई को यह साबित करने की जरूरत है कि ‘बलिदान बैज’ सेना का प्रतीक चिह्न नहीं है। यदि वर्ल्ड कप की टेक्निकल कमेटी सहमत हो जाती है तो वह धोनी को ग्लव्स पर ‘बलिदान बैज’ लगाकर मैच खेलने की मंजूरी दे सकती है। टीम इंडिया इस साल की शुरुआत में पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में सेना की कैप पहनकर खेलती थी।
बीसीसीआई के पत्र पर विचार किया जाएगा: आईसीसी
इसी बीच आईसीसी की स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन जनरल मैनेजर क्लेयर फरलॉन्ग से जब इसे लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब तक बीसीसीआई की तरफ से कोई पत्र नहीं मिला है। आईसीसी बाद में इस बारे में विचार करेगा। इससे पहले फरलॉन्ग ने कहा था कि विकेटकीपर के ग्लव्स पर सिर्फ निर्माता कंपनी का नाम लिखा होना चाहिए। धोनी का ग्लव्स आईसीसी के नियमों का उल्लंघन है। आईसीसी राजनीतिक और धार्मिक चिन्ह के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता।
पाक के मंत्री ने धोनी पर निशाना साधा
दूसरी ओर, पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद हुसैन चौधरी ने इस मामले में भारतीय विकेटकीपर पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत के लिए। भारतीय मीडिया का एक वर्ग युद्ध से इतना प्रभावित है कि उन्हें सीरिया, अफगानिस्तान या रवांडा में भाड़े के सैनिकों के रूप में भेजा जाना चाहिए।’’

