नई दिल्ली: ऐसे समय में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कारोबार के मुद्दे पर लगातार दूसरे देशों को निशाना बना रहे हैं, अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस भारत की यात्रा पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप वैसे तो पूर्व में भारत की औद्योगिकी नीति को लेकर कई बार तल्ख टिप्पणी कर चुके हैं। लेकिन उनकी तरफ से रॉस को भारत के दौरे पर भेजने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि रॉस मौजूदा सरकार के साथ कारोबार से जुड़े अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के साथ ही अमेरिकी कंपनियों के लिए संभावनाओं का भी पता लगाएंगे।
रॉस भारत की यात्रा पर अमेरिकी सरकार की ट्रेड विंड कार्यक्रम के तहत आए हैं जिसका उद्देश्य 40 देशों में अमेरिकी कारोबार को बढ़ावा देना है। उनकी अगुआई में अमेरिकी कंपनियों का दल भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही स्थानीय कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी मुलाकात करेगा और द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ाने संबंधी फैसले करेगा।
ई-कॉमर्स का मुद्दा अहम
रॉस ने भारत में कदम रखने के साथ ही यह बताने में कोई गुरेज नहीं किया कि वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के साथ मुलाकात में ई-कॉमर्स का मुद्दा काफी अहम रहेगा। उनके साथ आए दूसरे अधिकारियों ने भी माना कि ई-कॉमर्स पर भारत द्वारा उठाए गए कुछ हालिया कदम अमेरिकी कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे द्विपक्षीय कारोबार को लेकर चिंता पैदा हुई है जिसे दूर करना जरूरी है। हालांकि अमेरिकी दल यह भी स्वीकार करता है कि इस बारे में अब जो भी फैसला होगा, वह नई सरकार के गठन के बाद ही होगा। पिछले वर्ष ई-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियों के लिए एक नई नीति लागू की गई है, जिसका अमेजन व वालमार्ट समेत कई अमेरिकी कंपनियों पर असर पड़ा है।
रॉस ने सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मुलाकात की। इस दौरान ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध के मामले पर भी बात हुई है। इस प्रतिबंध की वजह से भारत अब ईरान से कच्चे तेल की खरीद नहीं कर सकेगा। रॉस से सोमवार को इस बारे में पूछा गया कि क्या अमेरिका भारत को भरपाई के तौर पर सस्ती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराएगा तो उन्होंने इसका नकारात्मक जवाब दिया। रॉस ने कहा कि अमेरिकी तेल निजी क्षेत्र के हाथ में है और सरकार उनकी कीमत को लेकर फैसला नहीं कर सकती है। इस बैठक में भारत में अमेरिकी राजदूत केनेथ जेस्टर भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि सउदी अरब समेत दूसरे देशों से बात हो रही है जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित न हो।

