हरिद्वारः “जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेति तत्वतः“ श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण अर्जुन को कहते है कि मेरे दिव्य जन्म व कर्मो को जो तत्व से जान लेता है उसका पुनर्जन्म नहीं होता। भगवान के इन श्रीवचनों को जो महापुरुष हृदयांगम कर लेते हैं उनका स्वयं का जीवन तो धन्य होता ही है, उनके मार्गदर्शन में चलने वालों का जीवन भी सार्थक हो जाता है।
संत आशाराम बापू के 83वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में, कल 24 अप्रैल को हर की पौड़ी मार्ग, हरिद्वार में साधकों द्वारा निःशुल्क दूध व पलाश शरबत का प्याऊ लगाया गया । चिलचिलाती धूप में रहागीरों की प्यास बुझाकर साधकों को अत्यंत संतुष्टि का अनुभव हुआ । आश्रम की मीडिया प्रभारी नीलू अरोड़ा ने बताया कि पूज्य बापूजी का अवतरण दिवस “विश्व सेवा-सत्संग दिवस” के रुप में पूरी दुनिया में मनाया जाता है । इस दिवस पर जहाँ साधक सेवाकार्यों द्वारा हृदय की उदारता का सुख पाते है, वहीं लाखों गरीब अनेक प्रकार से लाभान्वित भी होते हैं ।
25 अप्रैल को हरीपुर कलाँ स्थित संतश्री आशारामजी बापू आश्रम में सुबह 10:30 बजे से अवतरण दिवस कार्यक्रम आरंभ हुआ, जिसमें लगभग 250 गरीब परिवार भी आमंत्रित थे । इन गरीब परिवारों को पूज्य बापूजीं के वीडिओ सत्संग व बच्चों द्वारा मनमोहक आध्यात्मिक खेलों का लाभ मिला और साथ ही विशाल भंडारे में भोजन प्रसादी पाने के पश्चात् उनमें अनाज, वस्त्र, बर्तन व अन्य जीवनोपयोगी सामग्री का वितरण भी किया गया ।
इस अवसर पर दिलीप मौर्य, अरबिंद चौबे, प्रदीप बवेजा, योगश, कविता शर्मा, अंगुरी बहन, सरोज व मोना आदि उपस्थित रहे ।
अवतरण दिवस पर चले अनेक सेवाकार्य

