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Reading: राहुल का दावा खारिज, आतंकी मसूद संग कंधार नहीं गए थे अजीत डोभाल’
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राहुल का दावा खारिज, आतंकी मसूद संग कंधार नहीं गए थे अजीत डोभाल’

Last updated: March 12, 2019 10:02 am
Surabhi Saloni
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3 Min Read
File Photo
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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा कंधार अपहरण के दौरान अजीत डोभाल के आतंकी मसूद अजहर को छोड़ने अफगानिस्तान जाने का बयान उल्टा पड़ता दिख रहा है। रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने राहुल के दावे को खारिज कर दिया है। बता दें कि राहुल ने कहा था कि डोभाल 1999 में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के साथ भारतीय एयरलाइंस के अपहृत विमान में बंधक बनाए गए यात्रियों को छुड़ाने के लिए कंधार गए थे।
रक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया, ‘वह (डोभाल) भारतीय एयरलाइन IC-814 के अपहृत विमान में बंधक बनाए गए 161 यात्रियों को रिहा कराने के लिए आतंकी मसूद को कंधार ले जा रहे विमान में नहीं थे।’ उन्होंने कहा कि डोभाल उस समय आईबी में अडिशनल डायरेक्टर थे। वह मसूद को रिहा करने से पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से नियंत्रित हो रहे अपहरणकर्ताओं और तालिबान से बातीचत के लिए कंधार पहुंचे थे। इस बात की पुष्टि तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और तत्कालीन रॉ चीफ ए एस दुलत ने अपनी किताब ‘माई कंट्री, माई लाइफ ऐंड कश्मीर: द वाजपेयी इयर्स ‘ में भी की है।
कंधार अपहरण के समय तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह मसूद और अन्य दो आतंकियों उमर शेख (जिसने बाद में अमेरिका पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या की थी) और मुस्ताक जरगर के साथ कंधार रवाना हुए थे।
सूत्र ने बताया, ‘मसूद अजहर को रिहा करने का फैसला वाजपेयी सरकार ने किया था। सरकार ने अपहृत 161 भारतीयों को रिहा कराने का फैसला किया था क्योंकि अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बंधकों की हत्या कर देंगे। यह सही फैसला था या गलत, इसपर बहस हो सकती है। लेकिन इसका आरोप किसी अधिकारी पर नहीं लगाया जा सकता है।’
कंधार के आतंकियों ने पहले भारत की जेलों से 36 आतंकियों को रिहा करने 14 अरब रुपए की फिरौती की मांग रखी थी। जबकि डोभाल और अन्य वार्ताकारों (जिसमें आईबी में काम कर रहे एन एस सिद्धू और वरिष्ठ रॉ अधिकारी सी डी सहाय भी शामिल थे) ने आतंकियों की मांग को कम करने में सफलता पाई थी।

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