लखनऊ:अयोध्या के रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में गैर विवादित अधिग्रहीत जमीन का अधिग्रहण समाप्त करने की सुप्रीम कोर्ट में लगी अर्जी पर विवाद से जुड़े प्रमुख पक्षकारों की अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। इस विवाद में मुसलमानों की तरफ से प्रमुख पक्षकार आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई अर्जी का विरोध करने का एलान किया है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या की विवादित जमीन के मालिकाना हक के मुकदमे के मुस्लिम पक्षकारों में प्रमुख आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की कमेटी आन बाबरी मस्जिद और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने कहा है कि बोर्ड व कमेटी दोनों की तरफ से केन्द्र की इस अर्जी का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया जाएगा।
उन्होंने तर्क दिया कि 1994, 3003 और 2011 के अपने तीन स्थगनादेशों में सुप्रीम कोर्ट यह साफ कह चुका है कि जब तक अयोध्या के विवादित स्थल के मालिकाना हक के मुकदमे का फैसला नहीं हो जाता अधिग्रहीत जमीन का कोई भी हिस्सा किसी को भी नहीं दिया जा सकता। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तो केन्द्र की सरकार भी अयोध्या विवाद के इस मुकदमे में पक्षकार हो गई है तो फिर केंद्र सरकार की धर्मनिरपेक्षता कहां गई? रामजन्म भूमि न्यास अगर ऐसी अर्जी लगाता तो समझ में आता खुद केंद्र की सरकार ही अदालत में आ गई।
उन्होंने कहा कि अभी तो सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि इतने लंबे समय बाद अब केंद्र की इस अर्जी को संज्ञान में लिया भी जाए या नहीं और अगर संज्ञान में लिया जाता है तो वह सभी पक्षों को नोटिस जारी कर उनकी राय भी जानेगी, जहां मुस्लिम पक्षकार इसका विरोध करेंगे।
सियासी मकसद से उठाया गया कदम
बोर्ड की कार्यकारिणी के एक अन्य सदस्य व इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इसे लोकसभा चुनाव के मद्देनजर छोड़ा गया एक सियासी शोशा करार दिया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की विवादित जमीन से कोई छेड़छाड़ न होने पाए इसलिए आसपास की 67 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कि गयी थी। मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के प्रवक्ता डा. कासिम रसूल इलियास ने कहा कि केंद्र का यह कदम कुछ और नहीं सिर्फ यह दिखाना भर है कि वह अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए कोशिश कर रही है ताकि केंद्र की सरकार और भाजपा पर बन रहा दबाव कम हो सके। उन्होंने भी कहा कि बोर्ड केन्द्र की इस अर्जी का सुप्रीम कोर्ट में विरोध करेगा।

