बात 1988 की है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के चार साल बीत चुके थे, तभी एक मंच पर लोगों ने पहली बार प्रियंका को देखा। 16 साल की प्रियंका का यह पहला सार्वजनिक भाषण था। इस भाषण के 31 साल बाद तक कांग्रेस समर्थक पार्टी को उबारने के लिए जिस संजीवनी की मांग करते रहे हैं, वो अब पूरी हो गई है। प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति में पदार्पण हो चुका है। उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाकर पार्टी ने तुरुप का इक्का चल दिया है।
लोकसभा चुनाव से ऐन पहले उन्हें उत्तर प्रदेश के उन इलाकों की जिम्मेदारी मिली हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र पड़ते हैं और कांग्रेस यहां मृतप्राय है। ऐसे में प्रियंका के लिए सब कुछ बहुत आसान नहीं रहने वाला है, लेकिन इंदिरा गांधी के करिश्माई व्यक्तित्व को लेकर जब उनकी तुलना होने लगती है तो सारी चुनौतियां छोटी पड़ने लगती है और उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने-समझने की इच्छा होती है।
12 जनवरी 1972 को जन्मीं प्रियंका गांधी भाई राहुल गांधी से दो साल छोटी हैं। दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राहुल के साथ घर पर ही पढ़ाई जारी रही। दिल्ली विश्वविद्यालय के जीजस एंड मैरी कॉलेज से मनोविज्ञान में डिग्री हासिल की। 2010 में बौद्धिस्ट स्टडीज में मास्टर्स डिग्री की।
प्रियंका की अपने पति रॉबर्ट वाड्रा से 13 साल की उम्र में मुलाकात हुई। रॉबर्ट वाड्रा के पिता का नाम राजेंद्र वाड्रा तथा मां का नाम मॉरीन वाड्रा है, जो कि मूल रूप से स्कॉटिश हैं। उनका जन्ममुरादाबाद में हुआ। कारोबारी रॉबर्ट ने दिल्ली के ब्रिटिश स्कूल में पढ़ाई की। 1997 में दोनों ने शादी की। इनके दो बच्चे बेटा रिहान और बेटी मिराया हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की मुखिया सोनिया गांधी की दूसरी संतान और राहुल गांधी की छोटी बहन हैं। वह देश की इकलौती महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पोती और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की प्रपौत्री हैं।
अमेठी और रायबरेली में राहुल की तरह ही प्रियंका को भी लोग भइया पुकारते थे। बाद में उन्हें भइयाजी कहा जाने लगा। दरअसल बचपन से ही इनके छोटे बालों के चलते लोग ऐसा कहते थे।
चेहरा, हेयर स्टाइल, बात करने का तरीका और साड़ियां पहनने का सलीका इंदिरा गांधी से मिलता-जुलता है।
दादी की तरह मजबूत छवि और पिता की तरह जनता से सीधे संवाद करने की खासियत उन्हें गांधी परिवार में सबसे लोकप्रिय बनाती है।
‘24 अकबर रोड’ किताब लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई के मुताबिक साल 2004 के आम चुनाव के समय पार्टी ने एक प्रोफेशनल एजेंसी की सेवाएं लीं जिसने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताया कि वह अकेले बीजेपी के बड़े नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को टक्कर नहीं दे सकतीं। इसके बाद ही राहुल गांधी ब्रिटेन में अपनी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आए और इसी साल प्रियंका गांधी को भी चुनावी प्रचार में उतारा गया।
जब उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहती हैं तो उनका दिन सुबह छह बजे शुरू होता है। ट्रेडमिल पर मशक्कत और योग करना पसंद करती हैं। दौरे पर रोटी या परांठे के साथ सब्जी और दाल खाना पसंद करती हैं। साथ में आम/नींबू के अचार भी बड़े चाव से खाती हैं।
महज 16 साल की उम्र में दिया था प्रियंका ने अपना पहला भाषण

