मुंबई। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने अंबिका ज्वेलर्स नाम की एक शेल (फर्जी) कंपनी से जुड़े ₹35–40 करोड़ की अनुमानित बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। 2017 से चलाए जा रहे इस घोटाले में थोक आभूषण व्यापारियों को निशाना बनाया गया और उनसे लगभग 25 किग्रा सोने के गहनों की ठगी की गई। जहाँ एक मुख्य संदिग्ध पुलिस हिरासत में है, वहीं जांच से बड़े पैमाने पर संपत्ति जुटाने, राजनीतिक हस्तक्षेप और पीड़ितों को धमकाने की बात सामने आई है।
प्रमुख घटनाक्रम और आपराधिक धाराएं
गिरफ्तारी हुई: कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने मनीष लीला ताराचंद डागलिया (जिसे मनीष जैन के नाम से भी जाना जाता है) को गिरफ्तार कर लिया है। वह फिलहाल भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत पुलिस हिरासत में है।
लगाई गई धाराएं:
धारा 316, BNS: आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)
धारा 318, BNS: धोखाधड़ी और संपत्ति की डिलीवरी के लिए बेईमानी से उकसाना (Cheating and dishonestly inducing delivery of property)
धमकी और खौफ: पहचाने गए कुल 19 पीड़ितों में से अब तक केवल 4 व्यापारियों (आर आर जावेरी, उन्नति गोल्ड, शुभ ज्वैल्स और महालक्ष्मी टच) ने ही औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। शेष 15 पीड़ितों को फरार आरोपी कल्पेश दरबार और मनीष की मां लीला डागलिया द्वारा कथित तौर पर धमकाया गया था, जिसके खिलाफ एक गैर-संज्ञेय अपराध (NC) रिपोर्ट दर्ज की गई है।
तलाश जारी: पुलिस फरार सह-आरोपी कल्पेश दरबार की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
धोखाधड़ी का तरीका और मामला
इस बड़े पैमाने के नेटवर्क का संचालन अंबिका ज्वेलर्स नाम की एक शेल कंपनी के जरिए किया गया था, जिसे कल्पेश लक्ष्मण सिंह दरबार (कावेरी ज्वेलर्स एवं अंबिका ज्वेलर्स, गोवंडी से संबद्ध) और उसके साथी मनीष लीला ताराचंद डागलिया (तिलकनगर/कोशीवाड़ा) ने मिलकर बनाया था।
2017 से सक्रिय इस जोड़ी और उनके सहयोगियों ने सुनियोजित तरीके से 19 थोक आभूषण व्यापारियों को झांसे में लेकर लगभग 25 किग्रा सोने के आभूषण हड़प लिए।
अपराध की कमाई से बनाई गई संपत्तियां
जांचकर्ताओं ने ठगी के सोने से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा निकाला है:
अचल संपत्ति (रियल एस्टेट): आरोपियों ने तिलक नगर में 6 फ्लैट (दोनों के नाम पर तीन-तीन फ्लैट) और 2 दुकानें (दोनों या उनके परिजनों के नाम पर एक-एक दुकान) खरीदीं।
बैंक में जमा राशि: मनीष डागलिया के परिवार के पास ₹3 से 4 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है।
छिपाया गया सोना: 2024–2025 के दौरान धोखाधड़ी से हासिल किए गए सोने से ही मनीष डागलिया की पत्नी और मां के लिए लगभग 7 किग्रा सोने के आभूषण बनवाए गए। ये कीमती गहने फिलहाल राजस्थान के राजसमंद जिले के नाद्वारा (नाथद्वारा) तहसील मुख्यालय स्थित एक बैंक के दो लॉकरों में रखे हुए हैं।
राजनीतिक दबाव, धमकी और पुलिसिया बाधाएं
राजनीतिक प्रभाव के कारण इस जांच में कई अड़चनें सामने आई हैं:
राजनीतिक पहुंच: कल्पेश दरबार एक प्रमुख राजनीतिक दल में जिला मंत्री/पदाधिकारी का राजनीतिक पद रखता है।
धमकाने की रणनीति: अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाते हुए दरबार ने कथित तौर पर 19 में से 15 आभूषण व्यापारियों को आयकर (Income Tax), जीएसटी (GST) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापों की धमकियां देकर डराया-धमकाया।
कानूनी कार्रवाई पर असर: इस आक्रामक राजनीतिक दबाव के कारण कई पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे केवल 4 व्यापारियों का समूह ही आरोपियों के खिलाफ डटा रहा (और 5वां व्यापारी भी कानूनी लड़ाई में शामिल होने को तैयार है), जबकि पुलिस मुख्य आरोपियों को पूरी तरह गिरफ्तार करने के लिए राजनीतिक बाधाओं से निपट रही है।
अधिकारियों द्वारा अन्य संदिग्धों की तलाश और बची हुई संपत्तियों का सुराग लगाने के साथ जांच जारी है।
40-करोड़ के आभूषण घोटाले का पर्दाफाश: मुख्य आरोपी गिरफ्तार, राजनीतिक दबाव और धमकी के आरोप आए सामने

