सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: साधना के क्षेत्र में इंद्रियों का संयम आवश्यक : आचार्य श्री महाश्रमण
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

साधना के क्षेत्र में इंद्रियों का संयम आवश्यक : आचार्य श्री महाश्रमण

Last updated: October 9, 2026 11:09 pm
Surabhi Saloni
Share
3 Min Read
SHARE
Highlights
  • अनुशासन पर्व पर गुरुदेव द्वारा हाजरी का वाचन

लाडनूं। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन सन्निधि में आज चतुर्दशी के विशेष अवसर पर ‘अनुशासन पर्व’ मनाया गया। इस अवसर पर साधु – साध्वियों के मध्य हाजरी का उपक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पूज्य प्रवर ने मर्यादा पत्र का वाचन करते हुए मर्यादाओं की स्मारणा करवाई। कार्यक्रम में श्वेतांबर तेरापंथी मानव हितकारी संघ विद्या भूमि, राणावास के शिक्षक एवं विद्यार्थी गण विशेष रूप से उपस्थित हुए एवं गुरुदेव से पथदर्शन प्राप्त किया।
सुधर्मा सभा में साधु की साधना में पाँच महाव्रत और अष्ट प्रवचन माताओं के विशेष महत्त्व को रेखांकित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अष्ट प्रवचन माताओं में पाँच समितियाँ और तीन गुप्तियाँ सम्मिलित हैं, जिनका प्रयोजन साधु की प्रवृत्तियों को नियंत्रित करना और उन्हें संयमित रखना है। पाँच समितियाँ मुख्य रूप से प्रवर्तन और चारित्र में सक्रियता के लिए जानी जाती हैं, जबकि गुप्तियाँ निवर्तन यानी योगों को रोकने और अशुभ विषयों से दूर रखने के लिए अनिवार्य हैं। गुप्ति केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि 24 घंटे निरंतर रहनी चाहिए, चाहे साधु चले, बोले, सोए या आहार करे। 14वें गुणस्थान में जहाँ प्रवृत्ति का अभाव होता है, वहाँ केवल तीन गुप्तियाँ ही विद्यमान रहती हैं, समितियाँ नहीं। ध्यान-साधना और मन की एकाग्रता के लिए कायोत्सर्ग तथा शरीर की स्थिरता प्रथम चरण है। यदि मन चंचल हो, तो साधक को सबसे पहले अपने शरीर की स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि शरीर की स्थिरता ही ध्यान का आधार है। अशुभ प्रवृत्तियों से बचने के साथ-साथ हाथों, पैरों, वाणी और इंद्रियों का संयम रखना आवश्यक है। गुरुदेव ने आगे कहा कि तेरापंथ संघ में भिक्षु स्वामी द्वारा स्थापित मर्यादाएं संघ की मेरुदंड हैं, जिसमें सभी साधु-साध्वियों का एक आचार्य की आज्ञा में रहना सर्वोच्च है। विहार, चातुर्मास, शिष्य बनाने और दीक्षा देने जैसी व्यवस्थाओं में अनुशासन अपरिहार्य है। यदि किसी को कोई सिद्धांत या आचार की कोई बात समझ में न आए, तो दूसरों से चर्चा करने के बजाय आचार्य या बहुश्रुत साधुओं से परामर्श करना चाहिए। साधक को अपने मोक्ष-लक्ष्य में लीन रहना चाहिए और किसी भी बाधास्पद विषय में आचार्य या उनके द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति के निर्णय को सहजता से स्वीकार करना चाहिए। जो मुनि महाव्रतों और मर्यादाओं का प्रामाणिकता से पालन करता है, वही श्रमण परंपरा की सम्यक आराधना करता है। समस्त साधु-साध्वियों को चित्त-समाधि में रहते हुए धर्म और संघ की गौरव-वृद्धि के प्रति सदैव जागरूक रहना चाहिए।
कार्यक्रम में राणावास संस्थान के अध्यक्ष श्री मोहनलाल गादिया ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। शिक्षण एवं विद्यार्थियों ने गीत का संगान किया एवं प्रस्तुति दी।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article मुंबई में रामलीला को मिला भव्य रंगमंचीय स्वरूप, 11 से 20 अक्टूबर तक गिरगांव चौपाटी पर होगा आदर्श रामलीला महोत्सव 2026
Next Article तेरापंथ समाज जोगेश्वरी की गुरुदर्शन यात्रा सा आनंद सम्पन्न.!

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

ऑस्कर 2027 में ऐतिहासिक एंट्री के बाद अब दुनियाभर में होम्बले फिल्म्स द्वारा रिलीज होगी मराठी फिल्म ‘गोंधल’
entertainment
October 9, 2026
स्वयं-वी कनेक्ट की 11वीं बैठक आयोजित
social
October 9, 2026
LIC के वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान
social
October 9, 2026
न्याय की उम्मीद बना – दलित सम्मान व न्याय केंद्र(DDJC)
social
October 9, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?