चेन्नई। साध्वी श्री उदित यशा जी ने फरमाया कि स्वाध्याय दिवस ज्ञान की आराधना का दिवस है। व्यक्ति अपने दैनिक कार्यों को करते हुए भी ज्ञान की आराधना कर सकता है। ज्ञान की यह आराधना आत्मा को केवलज्ञान और अंततः मोक्ष की ओर ले जाती है। भगवान महावीर की जीवन-यात्रा इसका प्रेरणादायी उदाहरण है। उनकी साधना-यात्रा प्रेरक, आदर्शमय, स्मरणीय एवं अत्यंत कठोर थी।
उन्होंने निरंतर ज्ञान की आराधना और आत्मसाधना के द्वारा केवलज्ञान की प्राप्ति की। अतः स्वाध्याय केवल पढ़ना नहीं, बल्कि ज्ञान को जीवन में उतारकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना है। साध्वी श्री संगीत प्रभा जी ने भगवान ऋषभदेव के पूर्व भव का जीवन-प्रसंग बताते हुए फरमाया कि जब चित्त, वित्त और पात्र-तीनों की शुद्धता होती है, तो उसका प्रभाव इतना प्रबल होता है कि देवलोक का सिंहासन भी हिल जाता है।
साध्वी श्री भव्य यशा जी ने स्वाध्याय दिवस के संदर्भ में फरमाया कि मन की शांति का मार्ग है—पुस्तकालय। साध्वी श्री भव्य यशा जी एवं साध्वी श्री शिक्षा प्रभा जी ने पर्युषण पर्व के अवसर पर प्रकाश डालते हुए सुमधुर गीतिका का संगान किया।
चेन्नईः स्वाध्याय दिवस – ज्ञान की आराधनाः साध्वी श्री उदित यशा जी

