मुंबई। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ठाणा-6 के पवित्र सान्निध्य में चेम्बूर में पर्युषण का शानदार आगाज हुआ। ग्रैंड नालंदा बैंक्वेट के विशाल सभागार में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – विकेन्द्रित मन को विषयों से हटाकर चेतन में केन्द्रित होना पर्युषणा है। यह पर्व भगवान महावीर के समय से मनाया जाता है। आठ मास के विहार के पश्चात चातुर्मास में एक स्थान पर ठहरना / वसती करना पर्युषण है। संवत्सरी महापर्व पर्युषण का केन्द्र बिन्दु है। साध्वीश्री ने भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा के रोचक विवेचन के अन्तर्गत प्रथम जन्म ‘नयसार’ की विकास गाथा का वर्णन किया।
प्रबुद्ध साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में जन्ममरण की अनादि परंपरा की मार्मिक प्रस्तुति देते हुए भगवान ऋषभ की भव परंपरा के बारह भवों की रोचक कथा सुनाई। साध्वीश्री ने कहा – पर्युषण का समय अतीत की आलोचना के साथ भविष्य के प्रति साधना के संकल्प का है।
साध्वीश्री लावण्यप्रभाजी ने खाद्यसंयम के अनेक पहलुओं की चर्चा करते हुए आहार संयम की प्रेरणा दी। साध्वी मधुरप्रभाजी ने खाद्य संयम गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। साध्वीवृंद ने समूह स्वरों में पर्युषण गीत प्रस्तुत किया। मंगलाचरण चेम्बूर महिला मंडल ने किया। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष लक्ष्मणजी कोठारी ने पर्युषण पर्व की शुभकामनाएं देते हुए विशाल जनमेदनी का स्वागत किया। तेममं अध्यक्ष ममता कच्छारा ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर तालतरंग ग्रुप ने साध्वी योगक्षेमप्रभाजी द्वारा रचित भावपूर्ण गीत को वीडियो वर्जन के साथ लांच किया। दृश्य और श्रव्य दोनों दृष्टियों से गीत ने श्रोताओं की वाहवाही प्राप्त की।
रिपोर्ट : दीपक राठौड़
चेम्बूर के ग्रैंड नालंदा परिसर में पर्युषण का शानदार आगाज

