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अभिष्ट फल देने वाली होती है सत्संगति: राष्ट्रसंत आचार्यश्री महाश्रमण

Last updated: January 15, 2019 10:19 pm
Surabhi Saloni
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4 Min Read
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आचार्यश्री के दर्शनार्थ उमड़े तमिल श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री को बोला ‘पोंगल नाल वालतकल’
तन्जावुर (तमिलनाडु): दुनिया को आलोकित करने वाला सूर्य मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही उत्तरायण हो रहा था तो जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग निरंतर दक्षिणायन बने हुए थे और अपने ज्ञानरश्मियों के लोगों के आंतरिक अंधकार को दूर कर रहे थे।
अध्यात्म जगत के महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी मंगलवार को प्रातः माथुर से मंगल प्रस्थान किया। आज मकर संक्रांति का महापर्व पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जा रहा है, किन्तु अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों जाना जाता है। उत्तर भारत में जहां मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है तो वहीं असम आदि पूर्वोत्तर राज्यों में बिहू और दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। विहार मार्ग के आसपास के गांवों के लोगों सहित चारों ओर इस त्योहार के प्रति लोगों का उत्साह दृष्टिगोचर हो रहा था। सभी घरों के बाहर बनी रंगोलियां, बाजारों से ईख, हल्दी, केला आदि की खरीददारी करते लोग दिखाई दे रहे थे। आचार्यश्री को ग्रामीण वंदन करने के साथ ‘पोंगल वालतकल’ (पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं) भी कह कर अपनी भावाभिव्यक्ति दे रहे थे। आचार्यश्री सभी को अपना मंगल आशीष प्रदान करते हुए निरंतर गतिमान थे। लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर तन्जावुर जिला मुख्यालय स्थित तन्जावुर किले परिसर में स्थित राजा हायर सेकेण्ड्री स्कूल में पधारे। तन्जावुरवासियों ने विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया।
स्कूल प्रांगण में आयोजित मंगल प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में सत्संगति का महत्त्व होता है। आदमी सज्जन की संगति में रहता है तो अच्छे संस्कार उत्पन्न हो सकते हैं, और दुर्जन के साथ रहने से बुरे संस्कार आ सकते हैं। संतों की संगति तो आदमी का परम कल्याण करने वाली हो सकती है। आदमी को हमेशा साधु-संतों की संगति न भी मिले तो सज्जनों की संगति करने का प्रयास करना चाहिए। दुर्जन की विद्या विवाद को बढ़ाने वाली, सज्जन की विद्या दूसरों को विद्या देने वाली और विद्या को बढ़ाने वाली होती है। दुर्जन धन घमंड को बढ़ाने वाला सज्जन का धन दान देने के लिए तथा दुर्जन की शक्ति दूसरों को कष्ट पहुंचाने के लिए तो सज्जन की शक्ति किसी की सेवा करने और दूसरों को चित्त समाधि प्रदान करने वाली बनती है। इसलिए आदमी को सज्जनों की संगति करने का प्रयास करना चाहिए जो अभिष्ट फल प्रदान करने वाली हो सकती है। साधु की तो थोड़ी देर की संगति कितने पापों का नाश करने वाली होती है। शुद्ध साधु के मुखदर्शन से ही पाप झड़ते हैं। साधु और सज्जन की संगति हितकर हो सकता है। सन्मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए आदमी को सत्संगति में रहने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के पश्चात् आचार्यश्री के स्वागत में श्रीमती शशि बोहरा, श्री कमल गोलेछा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी तो श्रीमती मोनिका मेहता ने गीत का संगान किया। लायंस क्लब गवर्नर श्री मोहम्मद रफिक ने भी आचार्यश्री के समक्ष अपने हृदयोद्गार व्यक्त किए और आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।

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