पाली। मारवाड़ क्षेत्र में जल संकट के स्थायी समाधान तथा अरावली पर्वतमाला में बड़े जलाशयों के निर्माण की दिशा में चल रहे “कांकलावास बांध निर्माण परियोजना – पब्लिक सिग्नेचर कैंपेन” को एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक सफलता मिली है। हजारों ग्रामीणों, किसानों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं प्रवासी मारवाड़ी समाज के 6000 से अधिक हस्ताक्षरों से युक्त मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और जल संसाधन विभाग तक पहुंचने के बाद अब परियोजना विभागीय स्तर पर बजट प्रक्रिया के चरण में पहुंच गई है।
समाजसेवी भरतकुमार सोलंकी ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर बजरंग सिंह से ज्ञापन की नवीनतम स्थिति की जानकारी प्राप्त की। एडीएम ने उन्हें जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिशासी अभियंता शंकरलाल राठौर से संपर्क करने का सुझाव दिया। इसके बाद हुई चर्चा में अधिशासी अभियंता राठौर ने बताया कि कांकलावास बांध परियोजना की पूरी फाइल जयपुर स्थित विभागीय अधिकारियों के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रस्तुत की जा चुकी है और परियोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श भी हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में परियोजना के पुनः सर्वेक्षण तथा डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार करने के लिए आवश्यक बजट स्वीकृति का इंतजार है। बजट उपलब्ध होते ही तकनीकी सर्वेक्षण और आगे की विभागीय प्रक्रिया प्रारंभ की जा सकेगी। राठौर ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय विधायक के माध्यम से राज्य सरकार को बजट आवंटन हेतु अनुशंसा करवाई जाए, जिससे आगामी बजट में इस परियोजना को प्राथमिकता मिल सके।
इसी क्रम में समाजसेवी भरतकुमार सोलंकी ने मारवाड़ जंक्शन विधानसभा क्षेत्र के विधायक केसाराम चौधरी को विस्तृत ईमेल भेजकर परियोजना के समर्थन में राज्य सरकार एवं जल संसाधन विभाग को बजट उपलब्ध कराने हेतु अनुशंसा करने का आग्रह किया है। ईमेल में परियोजना का ऐतिहासिक विवरण, 1964–1974 के दौरान प्रारंभ हुए निर्माण कार्य, हजारों लोगों के हस्ताक्षर अभियान, जिला कलेक्टर कार्यालय की आवक संख्या 2927 दिनांक 23 अप्रैल 2026 तथा मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची विभागीय प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए इस जनहितकारी योजना को आगामी बजट में शामिल कराने का निवेदन किया गया है।
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक बांध के निर्माण का विषय नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण मारवाड़ के जल, कृषि और आर्थिक भविष्य का प्रश्न है। उनका विश्वास है कि यदि कांकलावास बांध परियोजना को पुनर्जीवित किया जाता है और भविष्य में अरावली पर्वतमाला में प्रस्तावित बड़े पक्के बांधों के निर्माण की दिशा में सरकार आगे बढ़ती है, तो भूजल स्तर में सुधार, सिंचाई क्षमता में वृद्धि, पेयजल सुरक्षा और औद्योगिक विकास के नए द्वार खुलेंगे। ग्रामीणों एवं प्रवासी समाज ने आशा व्यक्त की है कि अब जबकि परियोजना प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर आगे बढ़ चुकी है, जनप्रतिनिधियों के सहयोग से इसे आगामी राज्य बजट में स्थान मिलेगा और वर्षों से अधूरी पड़ी यह महत्वाकांक्षी योजना पुनः धरातल पर उतर सकेगी। यह अभियान अब एक स्थानीय मांग से आगे बढ़कर “हरित, समृद्ध और जल-संपन्न मारवाड़” के व्यापक जनसंकल्प का रूप लेता जा रहा है।
कांकलावास बांध परियोजना को मिली बड़ी प्रशासनिक गति, अब बजट स्वीकृति की ओर बढ़ा मामला

