नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।
जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि बहुत जानकार और हमेशा स्टाइलिश कपड़ों में सजे-धजे विदेश मंत्री ने जिसे ‘दलाल’ देश बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है-ऐसी खबरें हैं। 12 अप्रैल को इन वार्ताओं के पहले दौर के पूरा होने के बाद, पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से 6 अरब डॉलर उधार लिए, ताकि संयुक्त अरब अमीरात से लिए गए 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था स्पष्ट रूप से गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों द्वारा दी जाने वाली सहायता पर निर्भर है। लेकिन फिलहाल वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है-जबकि उसने ओसामा बिन लादेन और अन्य आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग रिहैबिलिटेशन केंद्रों पर बमबारी की, और हाल ही में एक वर्ष पहले पहलगाम आतंकी हमले की साजिश रची।
उन्होंने आगे लिखा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति के सार और शैली, तथा नैरेटिव प्रबंधन, पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रहे हैं-जबकि उसे एक बिल्कुल नई छवि मिल गई है, जो नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा हासिल स्थिति से उलट है। यह भारत के लिए विशेष रूप से बड़ा झटका है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर-जिसके भड़काऊ और उत्तेजक बयानों ने पहलगाम आतंकी हमले को हवा दी-अब राष्ट्रपति ट्रंप का इतना पसंदीदा बन गया है। यह भी स्पष्ट है कि फील्ड मार्शल और उसके साथियों ने ट्रंप के परिवार और करीबी साथियों के इकोसिस्टम को संभालने में भारत की तुलना में कहीं अधिक सफलता पाई है।
यह भी पीएम मोदी की विदेश नीति के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है-जिसके लिए पीएम मोदी बिल्कुल भी सक्षम नहीं हैं।
शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी : कांग्रेस

