नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधयेक लोकसभा में पारित नहीं होने को “लोकतंत्र की बड़ी जीत” बताया है।
श्रीमती प्रियंका गांधी शनिवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और देश के संघीय ढांचे में बदलाव की “साजिश” कर रही थी, जिसे विपक्ष ने मिलकर विफल कर दिया। जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा है और कहा है आज का दिन देश के लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय के तौर पर जुड़ गया है।
श्री सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आज का दिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संसद के विशेष सत्र के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक, महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए लाया गया था। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने आज लोकसभा में इस विधेयक के विरोध में वोट करके अपना महिला विरोधी चरित्र दिखा दिया है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 शुक्रवार को दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। यह मोदी सरकार के 12 वर्षों में पहला ऐसा संविधान संशोधन विधेयक है जो लोकसभा में गिर गया।लोकसभा में मतदान के दौरान कुल 528 सदस्यों ने भाग लिया। विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 वोट। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 352 वोट चाहिए थे, लेकिन सरकार को केवल 298 वोट ही मिल सके। विधेयक 54 वोट से कम पड़ गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान परिणाम घोषित करते हुए कहा कि विधेयक दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पारित नहीं हो सका, इसलिए इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
यह विधेयक 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) को लागू करने के लिए लाया गया था। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को 2029 के चुनावों से लागू करने, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने (लगभग 850 तक) और परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया से जोड़ने का प्रस्ताव था। इससे जुड़े परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक भी सदन में पेश किए गए थे।विपक्ष ने विधेयक का विरोध किया। कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर दक्षिण भारतीय राज्यों की प्रतिनिधित्व कम करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष ने जाति जनगणना की मांग भी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष से “अंतःकरण की वोटिंग” की अपील की थी, लेकिन विपक्ष नहीं माना।सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस असफलता के बाद संबंधित अन्य विधेयक भी वापस ले लिए गए। भाजपा ने इसे विपक्ष की “नारी शक्ति का अपमान” बताया और देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और देश के संघीय ढांचे में बदलाव की “साजिश” नाकामः प्रियंका गांधी
Highlights
- भाजपा ने विपक्ष की "नारी शक्ति का अपमान" बताया, देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी

