मुंबई। युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमार जी एवं मुनि श्री मुकुल कुमार जी के सान्निध्य में अणुव्रत सभागार मरीन ड्राई में जैन आगम मंत्र दर्शन कार्यशाला का आयोजन किया गया इस अवसर पर मुनि कुलदीप कुमार जी ने कहा जैन दर्शन के अनुसार आत्मा पर कर्मों का बंधन होता है।
नवकार मंत्र का जप करने से मन शुद्ध होता है। और कर्मों का क्षय होता है। जब साधकनिष्ठा से इसका जप करता है तो उसके भीतर नम्रता, समता और आत्मशुद्धि का भाव जागृत होता है।
मुनि मुकुल कुमार जी ने कहा नवकार मंत्र जैन धर्म का सबसे प्राचीन और सार्वभौमिक मंत्र है। इसकी विशेषता यह है कि यह किसी व्यक्ति, देवता या अवतार की स्तुति नहीं करता।
आत्मिक गुणों की वंदना करता है। इस दृष्टि से यह मंत्र अत्यंत सा दार्शनिक और गहन है इस मंत्र का विलक्षण पक्ष यह है कि यह मनुष्य को बाहरी पूजा से अधिक आत्म-परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करता है। जब कोई व्यक्ति शांत होकर इस मंत्र का जप करता है तो उसकी श्वास और मन दोनों धीरे-धीरे स्थिर होने लगते है और मन में सकारात्मक ऊर्जा बढने लगती है।
मुनि श्री मुकुल कुमार ने नमोकार पैतीसीव्रत का रहस्योद्घाटनकर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया इससे पूर्व कार्यक्रम का मंगलाचरण दक्षिण मुंबई की महिला मंडल के अध्यक्षा लतिका डागलिया और उनकी टीम ने किया।
सभा अध्यक्ष सुरेश डागलिया ने कार्यशाला में पधारे हुए महानुभावों का स्वागत करते हुए कहा -कई वर्षों बाद में अणुव्रत सभागार में आयोजित यह कार्यक्रम नये इतिहास की रचना कर रहा है।
इस अवसर पर स्थानीय नगर सेवक श्री आकाश राजपुरोहित विशेष रूप से उपस्थित थे समाज द्वारा आदरणीय राज के पुरोहित जी के निधन पर 1 लोगस्स का पाठ करके श्रद्धाजंलि दी गई।
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा,अणुव्रत ट्रस्ट,तेरापंथ युवक परिषद,महिला मंडल,आचार्य महाप्रज्ञ विद्या निधि फाउंडेशन अणुव्रत समिति के पदाधिकारी एवं दक्षिण मुम्बई ,बोइसर,वर्ली,परेल,दादर का श्रावक भी उपस्थित थे। सभा के उपाध्यक्ष नितेश धाकड़ ने आभार ज्ञापन किया। सभा के मंत्री दिनेश धाकड़ ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। यह जानकारी तेयुप अध्यक्ष गिरीश शिशोदिया ने दी।

