कोलकाता। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदान केंद्र स्थापित करने के लिए कई ऊंची इमारतों वाले आवासीय परिसरों की पहचान करने के लिए अपनी स्वतंत्र व्यवस्था की तैनाती का फैसला किया है, क्योंकि जिले के संबंधित अधिकारी इस काम को तय समय-सीमा में पूरा करने में नाकाम रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी(सीईओ) कार्यालय ने बताया कि यह फैसला 30 दिसंबर को हुई एक समीक्षा बैठक के बाद लिया गया क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) 300 या उससे अधिक मतदाताओं वाले आवासीय परिसर की सूची जमा करने में नाकाम रहे। गौरतलब है कि राज्य में जिला मजिस्ट्रेट ही जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी काम करते हैं। उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती की अध्यक्षता में हुई यह बैठक योजना के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित की गयी थी।
बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी और उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। आयोग द्वारा 31 दिसंबर को अंतिम समय-सीमा तय किए जाने के बावजूद कई जिले तब तक भी समेकित सूची जमा करने में नाकाम रहे। सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर यूनीवार्ता को बताया, “डीईओ लगातार दो बार इस समयअवधि में अपना दायित्व पूरा करने से चूक गए। आयोग ने जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति न होने के कारण मतदान केंद्र के लिए उपयुक्त आवासीय परिसर की पहचान करने के लिए अपनी स्वतंत्र व्यवस्था सक्रिय करने का फैसला किया है।”
बंगाल में चुनाव आयोग ने मतदान केंद्र स्थापित करने के लिये स्वतंत्र व्यवस्था तैनात करने का किया फैसला

