नयी दिल्ली। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आज 24 नवम्बर 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में उन्हें मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल नौ फ़रवरी 2027 तक होगा। उन्होंने न्यायमूर्ति बी. आर. गवई का स्थान लिया है, जो 23 नवंबर को सेवानिवृत हुए हैं।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी तथा कई अन्य प्रमुख केन्द्रीय मंत्री और गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
देश के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर कहा है कि महत्वपूर्ण संविधान-पीठ के निर्माण एवं शीघ्र निर्णय के लिए वह विशेष रूप से प्रयास करेंगे। न्यायिक प्रणाली में समय-सापेक्षता और न्याय पहुँच सुनिश्चित करना, यह एक समकालीन विषय है और नया CJI इसे प्राथमिकता दे सकते हैं। नए मुख्य न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र न्यायपालिका तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा-प्रवर्तन को लेकर अपेक्षाएँ हैं, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जो अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता, निर्वाचन-प्रक्रिया, संवैधानिक अधिकारों से जुड़े हैं।
भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपने पीछे एक मजबूत न्यायिक विरासत छोड़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाई, जिनका देश की राजनीति, नागरिक अधिकारों और संविधान पर दूरगामी प्रभाव पड़ा। जस्टिस सूर्यकांत उस पाँच-सदस्यीय संविधान पीठ का हिस्सा थे जिसने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को बरकरार रखा। इस निर्णय में उन्होंने राष्ट्रीय एकता, संसदीय प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या पर महत्वपूर्ण राय रखी थी।
पेगासस स्पाइवेयर के दुरुपयोग संबंधी आरोपों पर उन्होंने पारदर्शिता और निजता-अधिकार की रक्षा को प्राथमिकता दी। उनकी बेंच ने स्पेशल सुपरविजन कमेटी बनाने, तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को स्वतंत्र जाँच सौंपने का आदेश दिया। यह फैसला निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मजबूत करता है। चुनावी पारदर्शिता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उन्होंने चुनाव आयोग को जवाबदेह ठहराया। उनकी टिप्पणी रही कि “चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा सर्वोपरि है”। इस दौरान उन्होंने VVPAT मिलान में सुधारों को लेकर भी कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कई मामलों में कहा कि भ्रष्टाचार लोकतंत्र और प्रशासन -दोनों को खोखला करता है। उनके फैसले पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक व्यक्तियों की जवाबदेही को मजबूत करते हैं।
दिल्ली-एनसीआर और हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संकट पर उन्होंने लगातार कड़े निर्देश दिए। अवैध खनन पर रोक, नदी और जंगल संरक्षण के सख्त निर्देश, निर्माण गतिविधियों पर नियमन। COVID-19 और अन्य संकटों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मामलों में उन्होंने राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “कमजोर वर्गों की रक्षा राज्य का अनिवार्य दायित्व है।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कोर्ट-मैनेजमेंट और ई-कोर्ट प्रणाली को बढ़ावा देने वाले कई आदेश और टिप्पणियाँ कीं। उनका रुख हमेशा तेज, सुलभ और आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के पक्ष में रहा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ली सुप्रीम कोर्ट के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ

