नई दिल्ली:दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है। केजरीवाल इसे भाजपा का चुनावी स्टंट भी बता रहे हैं। उन्होंने ट्विटर पर कहा- चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे, हम सरकार का साथ देंगे। नहीं तो साफ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का जुमला है।
‘आप’ के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी ट्वीट कर कहा- ‘आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण जातियों के लिए मोदी सरकार ने 10 फीसदी आरक्षण का स्वागत योग्य चुनावी जुमला छोड़ दिया है। ऐसे कई फैसले राज्यों ने समय-समय पर लिए, लेकिन 50 फीसदी से अधिक आरक्षण पर कोर्ट ने रोक लगा दी। क्या ये फैसला भी कोर्ट से रोक लगवाने की एक नौटंकी है?’ 10 फीसदी आरक्षण के लिए संविधान संशोधन करना होगा। सरकार विशेष सत्र बुलाए हम साथ देंगे, वरना यह मात्र जुमला साबित होगा।’
ये फंस सकता है पेंच
आरक्षण का कोटा मौजूदा 49.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 59.5 प्रतिशत किया जाएगा। लंबे समय से आर्थिक रूप से पिछले सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग की जा रही थी। परंतु सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक आरक्षण कोटा नहीं हो सकता, ऐसे में नए फैसले पर पेंच फंस सकता है।
-एनसीपी का भी समर्थन
शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने भी केंद्रीय कैबिनेट के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
इनका कुछ नहीं होने वाला : कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे चुनावी जुमला करार देते हुए कहा कि इससे मोदी सरकार बच नहीं पाएगी। उन्होंने कहा- ‘बहुत देर कर दी मेहमान आते-आते। यह ऐलान ऐसे वक्त हुआ है जब चुनाव नजदीक है। वे कुछ भी कर लें, उनका कुछ नहीं होने वाला। कोई भी जुमला उछाल दें, उनकी सरकार नहीं बचने वाली।’
बसपा ने भी की थी मांग
बसपा अध्यक्ष मायावती लंबे समय से गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग करती रही हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्र सरकार को इस संबंध में पत्र लिखा था। सवाल उठता है कि क्या संविधान संशोधन विधेयक आने पर इस विधेयक को मायावती का नैतिक समर्थन मिलेगा, क्योंकि लोकसभा में बसपा का कोई सांसद नहीं है।
लोजपा की 15 फीसदी की मांग
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान भी सवर्ण आरक्षण के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने पटना में गरीब सवर्णों के पक्ष में 15 फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी। देखने यह है कि वे सरकार के फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
25 फीसदी आरक्षण की मांग
आरपीआई के अध्यक्ष और मोदी सरकार में मंत्री रामदास आठवले भी गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग करते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि सवर्णों में सभी आर्थिंक रूप से सम्पन्न नहीं होते, इसलिए सवर्ण जातियों को 8 लाख रुपये की क्रीमीलेयर लगाकर 25 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।
ये दस्तावेज होंगे जरूरी
आरक्षण का लाभ उन्हीं सवर्णों को मिलेगा, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है। आरक्षण का लाभ लेने के लिए जाति प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड (अगर हो तो), पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पास बुक और इनकम टैक्स रिटर्न भी दिखाना जरूरी होगा।
सवर्ण आरक्षण: आप-एनसीपी का समर्थन; माया, पासवान व अठावले कर चुके हैं मांग

