खान्देश। युवामुनीश्री युवातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी पद्मावतीजी के सानिध्य मे खान्देश के शिरपूर क्षेत्र मे बृहद मंगलपाठ का आयोजन हुआ लगभग 300 से 400 भाई बहन सहभागी बने। शहादा, दोंडाईचा, बोराला, कहाटूल, नंदुरबार, साक्री, पिंपळनेर, अमळनेर, वाडी, मालेगाव शासनश्री साध्वी पद्मावतीजी ने कहा- मनुष्य सदा अपने आप को बचाने का प्रयास करता है, विघ्न बाधाओ के निवारण का उपाय खोजता है, पर अपने पौरुष और श्रम को तभि सार्थक और सफल मानता है जब उसका प्रारब्ध कार्य निष्पती तक पहुँच जाता है। अभिष्ट सिद्धी के लिये बृहद मंगलपाठ एक मंत्र भी है और शुभ कार्य के लिये या भविष्य के लिये भी जानेवाली मंगलकामना का भी धोतक बने। जनवरी का पहला दिन ही नही हर क्षण,हर समय, हर महिना, हर वर्ष हमारे नैतिक कार्य से शुभ एवं मंगलमय बना रहे।
डॉ साध्वी श्री गवेशनाजी ने कहा – संस्कृत का एक सुंदर सूत्र है ” प्रयोजनमंतरेनं न मनदोडपी प्रवर्तते “! बिना प्रयोजन के मंद व्यक्ती भी किसीं कार्य मे प्रवृत्त नही होता तो बुद्धीमान कहलानेवाला व्यक्ती अकारण उसमे क्यो प्रवृत्त होगा। यह सच्चाइ है प्रत्येक कार्य के साथ व्यक्ती की अपनी एक कामना जुडी हुई है। आज का बृहद मंगलपाठ भी कामना लिये हूए है। हर व्यक्ती के मन मे चाह है कि हमारा यह वर्ष आनंदमय, मंगलमय,शुभमय बिते। इस भावना के पीछे मंत्रो की भी अपनी बहोत बडी भूमिका रहती है। साध्वी मयंकप्रभाजी ने कहा आज का दिन समीक्षा का है। वर्ष भर मे हमने क्या पाया क्या खोया इसका चिंतन करणा है। जो अवशेष है उसे पूर्णता का संकल्प देना है। पुराना कॅलेंडर उतारकर नया कॅलेंडर टांग देना ही नव वर्ष का प्रवेश नही है! कुछ अतीत का सिंहावलोकन व भविष्य की परिकल्पना का नाम ही नव वर्ष है!साध्वी मेरुप्रभाजी ने सुमधुर गितीका के द्वारा अपनी अभिव्यक्ती दी।
मालेगाव से समागत सभा अध्यक्ष मदनजी कांकरिया ने मर्यादा महोत्सव के लिये अर्ज की। अतिथीयो का स्वागत -तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्रीमान कांतीलालजी गेलडा ने किया।
आभार प्रदर्शन – तेरापंथ सभा के मंत्री दिलीपजी बाफना ने साध्वीजी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए अतिथीयो का आभार किया, व्यक्त किये।
तथपश्चात तेरापंथ सभा शहादा द्वारा तप-अभिनंदन सम्मान, उपासक श्रेणी का सम्मान, कार्यकर्ता सम्मान, प्रतिभा पुरस्कार आदि विशिष्ट सम्मान किये गए।
खान्देश में नववर्ष पर मंगल पाठ

