भांयदर (मुंबई)। शासनश्री साध्वी विद्यावतीजी’ द्वितीय ‘ठाणा 5 के सात्रिध्य में पर्युषण पर्व का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस के रुप में मनाया गया। साध्वीश्री जी द्वारा नमस्कार महामंत्र का उच्चारण किया गया। तेरापंथ महिला मंडल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। साध्वीश्री प्रियंवदाजी ने स्वाध्याय दिवस पर वक्तव्य देते हुए कहा- निर्जरा के बारह प्रकारों मे एक स्वाध्याय का भी नाम आता है। सतसाहित्य पढ़ना एवं पढ़ाना स्वाध्याय है। स्वाध्याय से ज्ञानावरणीय कर्म क्षीण होता है। साथ ही साथ ज्ञान की अभिवृद्धि भी होती है।
साध्वीश्री विद्यावतीजी ने कहा-स्वाध्याय से जीवन को नई दिशा मिलती है। दिशा सही होती है तो दशा भी बदल जाती है। इसलिए प्रतिदिन कम से कम दस मिनट तो स्वाध्याय करना ही चाहिए। साध्वीश्री जी ने प्रतिदिन के प्रवचन क्रम को आगे बढ़ाते हुए भगवान महावीर के 27भवों में से तीसरे भव तक का विवेचना किया। प्रवचन के प्रारंभ में साध्वीश्री प्रेरणाश्री जी ने प्रेक्षाध्यान का प्रयोग करवाया।
स्वाध्याय से होती है कर्म निर्जरा: साध्वी विद्यावती

