स्पेशल रिपोर्ट, पटना ब्यूरो। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को ‘लोकतंत्र के खिलाफ साजिश’ करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जबकि ECI और सत्तारूढ़ एनडीए इसे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी बता रहे हैं। हाल ही में इसकी खामियों पर खबर कर रहे मशहूर पत्रकार अजित अंजुम पर FIR भी दर्ज किया गया जिसकी जबरदस्त निंदा की जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार के 8 करोड़ मतदाताओं की डोर-टू-डोर सत्यापन प्रक्रिया शुरू की। यह पहला मौका है जब 2003 के बाद बिहार में इतने बड़े पैमाने पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण हो रहा है। इसके तहत:मतदाताओं को फॉर्म भरकर अपनी तस्वीर, पहचान और पते का प्रमाण जमा करना होगा। 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने वालों, खासकर 1987 के बाद जन्मे मतदाताओं को माता-पिता के जन्म विवरण जैसे अतिरिक्त दस्तावेज देने होंगे। ECI का दावा है कि यह प्रक्रिया मृत, प्रवासी, और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं को हटाने के लिए है। जबकि विपक्षी दलों (इंडिया गठबंधन) ने इसे ‘वोटर पर्ज’ और ‘एनडीए के पक्ष में मतदाता सूची में हेरफेर’ का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया गरीब, दलित, और अल्पसंख्यक समुदायों को वोटिंग के अधिकार से वंचित कर सकती है।
35.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की तैयारी: ECI के मुताबिक, अब तक 6.6 करोड़ मतदाताओं (88.18%) ने अपने फॉर्म जमा किए हैं। 25 जुलाई तक फॉर्म जमा करने की समय सीमा है, जिसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी। ECI ने बताया कि:12.5 लाख (1.59%) मतदाता मृत पाए गए, जिनके नाम अभी सूची में हैं। 17.5 लाख (2.2%) लोग बिहार से स्थायी रूप से बाहर चले गए। 5.5 लाख (0.73%) दोहरे पंजीकरण के मामले हैं। इन कारणों से लगभग 35.5 लाख नाम हटाए जा सकते हैं, जो कुल मतदाताओं का 4.5% है।
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को SIR के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन ECI को आधार कार्ड, वोटर ID (EPIC), और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को सत्यापन के लिए स्वीकार करने का सुझाव दिया। कोर्ट ने इस प्रक्रिया के समय और वैधानिकता पर सवाल उठाए, क्योंकि यह “लोकतंत्र और वोटिंग के अधिकार की जड़ों” से जुड़ा है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी, और ECI को 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करना है।
विपक्ष का विरोध और बिहार बंद: इंडिया गठबंधन, जिसमें RJD, कांग्रेस, और अन्य दल शामिल हैं, ने SIR को ‘नागरिकता सत्यापन’ जैसा बताकर इसका विरोध किया। RJD नेता तेजस्वी यादव ने इसे “मोदी, शाह और नीतीश की साजिश” करार दिया, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार बंद रैली में हिस्सा लिया। विपक्ष का दावा है कि आधार और मनरेगा कार्ड जैसे आम दस्तावेजों को स्वीकार न करना और ERO (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को असीमित अधिकार देना लाखों मतदाताओं को वंचित कर सकता है।
इस बीच ECI ने दावा किया कि SIR का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध करना है, और यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू होगी, बिहार सिर्फ शुरुआत है। ECI ने यह भी खुलासा किया कि सत्यापन के दौरान नेपाल, बांग्लादेश, और म्यांमार के कुछ विदेशी नागरिक मतदाता सूची में पाए गए, जिनके नाम हटाए जाएंगे। ECI ने कहा कि वह वृद्ध, बीमार, और कमजोर समूहों को परेशान न करने के लिए सावधानी बरत रहा है।
अगर इन दावों और सच्चाई का विश्लेषण करें तो पिछले दिनों वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम वे इस पूरी प्रक्रिया की गंभीर खामियों को उजागर किया था, जिसके बाद पूरे प्रशासन में अफरा तफरी मच गई थी। इसी लेकर लेकर उनके ऊपर एफआईआर भी दर्ज किया गया है।
सत्तारूढ़ BJP ने विपक्ष पर “अवैध मतदाताओं” को बचाने का आरोप लगाया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BJP की अपनी सर्वे टीम को जनता का गुस्सा झेलना पड़ रहा है। कुछ BJP समर्थकों ने भी कहा कि उनके पास आधार और वोटर ID होने के बावजूद उनके नाम हटाए जा सकते हैं। जबकि विपक्ष ने SIR की प्रक्रिया में कई खामियों की ओर इशारा किया, जैसे:मुजफ्फरपुर में एक महिला के बेटे का पता श्मशान घाट और बहू का पता खाली दर्ज होना। गया में एक अधिकारी का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होना। बेगूसराय में गलत जानकारी देने के मामले। कुल मिलाकर बिहार का यह SIR विवाद न केवल मतदाता सूची की शुद्धता, बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहा है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह मामला और गर्माने की संभावना है।
बिहार में SIR विवाद: मतदाता सूची में ‘शुद्धता’ के बहाने मतदाताओं के खिलाफ साजिश तो नहीं!
Highlights
- इलेक्शन कमीशन पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
- प्रक्रिया में मिली खामियों के बीच SIR खामियों से कैसे निपटेगा चुनाव आयोग?
- क्या जनता की समस्याओं पर भी सत्तापक्ष या चुनाव आयोग ध्यान देगा?

