नई दिल्ली:कल तक कंप्यूटर की निगरानी को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रही कांग्रेस आज खुद इस मुद्दे पर घिरती दिखाई दे रही है। दरअसल, एक आरटीआइ के जवाब में यह खुलासा हुआ है कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान 2013 में हर माह लगभग 9000 फोन और 500 ई-मेल इंटरसेप्ट किए जाते थे।
गृह मंत्रालय को 2013 नवंबर में फाइल किए गए आरटीआइ के दिए गए जवाब की रिपोर्ट के अनुसार हर माह केंद्र सरकार से फोन इंटरसेप्ट के लगभग 7500 से 9000 आदेश मिलते थे। गृह मंत्रालय को इसी को लेकर फाइल की गई एक और आरटीआइ के जवाब से पता चला है कि सरकार से लगभग हर माह 300 से 500 ई-मेल इंटरसेप्ट करने का आदेश मिलते थे। यह आरटीआइ अगस्त 2013 में फाइल की गई थी।
नवंबर 2013 में फाइल की गई इस आरटीआइ के जवाब में उन एजेंसी के नाम का खुलासा हुआ है जिनके पास इसका अधिकार था। इसके अनुसार इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो,नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो,प्रवर्तन निदेशालय,सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआइ, एनआइए, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (रॉ), डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस, दिल्ली के कमिश्नर ऑफ पुलिस शामिल थे। ये सभी एजेंसियों वही हैं जिनके नाम वर्तमान भाजपा सरकार ने 20 दिसंबर 2019 दिए थे।
आरटीआइ के जवाब में यह भी खुलासा हुआ कि संचार का अवरोधन टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत हो रहा है। यह एक्ट 2007 में सेशोधित किया गया जिसका जिक्र कल सरकार ने इस मुद्दे पर सफाई देते वक्त किया था।

