नई दिल्ली:दिल्ली-एनसीआर में छाए प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने कृत्रिम बारिश की तैयारी तो कर ली है लेकिन इसके लिए सरकार को अब बादल नहीं मिल रहे हैं। बारिश वास्तविक हो या कृत्रिम उसके लिए उपयुक्त बादलों की दरकार होती है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बादल छाने के आसार नहीं हैं। इसलिए बादल के बिना कृत्रिम बारिश भी नहीं हो सकती।
इस महीने के शुरू में हुई बैठक में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने प्रदूषण को कम करने के लिए कई और विकल्पों के अलावा कृत्रिम बारिश कराने का भी ऐलान किया था। खबर है कि इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा चुकी हैं। विमान मंत्रालय से भी अनुमति ली जा चुकी है तथा कृत्रिम बारिश कराने वाली एक एजेंसी से भी बातचीत की जा चुकी है। कंपनी ने सभी तैयारियां पूरी कर रखी हैं। एक वायुयान भी तैयार है। लेकिन बादलों का इंतजार किया जा रहा है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव सी. के. मिश्रा ने कहा कि हमारी तैयारी पूरी हैं लेकिन हम बादलों का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. के. जे रमेश ने कहा कि यह कार्य सीपीसीबी करा रहा है, हमें सिर्फ यह बताना है कि बादल कब छाएंगे। लेकिन अगले कुछ दिनों तक इसके आसार नहीं हैं। दरअसल, सर्दियों में कृत्रिम बारिश कराना मुश्किल होता है। बारिश के लिए पहली जरूरत गहरे काले बादलों की होती है जो बढ़ रहे हों। साथ ही हवा में नमी की मात्रा भी होनी चाहिए। ऐसे बादलों पर विमान से सिल्वर आयोडाइड, ड्राई आईस और नमक का छिड़काव किया जाता है, इस प्रक्रिया में बादल बरसने लगते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बारिश में इसके अलावा और भी कई पेंच हैं। प्रक्रिया महंगी है। यदि एक घंटे विमान दिल्ली के ऊपर छिड़काव करता है तो एक घंटे की उड़ान का खर्चा लाखों रुपये होगा। दूसरे, फिर जरूरी नहीं है कि बारिश हल्की होगी या तेज होगी। कई बार पूरी प्रक्रिया फेल भी हो जाती है। दूसरे, यदि बारिश ठीकठाक हो भी गई तो एक घंटे की बारिश से अगले 24 घंटों तक ही प्रदूषण से राहत मिलेगी। इसके बाद फिर बारिश कराने की जरूरत होगी। क्लाईमेट ट्रेंड की आरती खोसला ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश कराना एक विकल्प हो सकता है लेकिन प्रदूषण से निपटने का स्थाई उपाय किए जाने चाहिए।
दिल्ली के अलावा कहीं कृत्रिम बारिश की योजना नहीं-केंद्र
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि दिल्ली से बाहर किसी अन्य राज्य में कृत्रिम बारिश कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सिर्फ दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे आजमाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हिन्दुस्तान से बातचीत में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव सी. के. मिश्रा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे करने की योजना बनी है। इससे देखा जाएगा कि यह प्रयोग कितना सफल और कारगर होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य शहर में कृत्रिम बारिश कराने की पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कोई योजना नहीं है।
दिल्ली में कृत्रिम बारिश के लिए सरकार को बादलों का इंतजार

