नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलेह के शपथग्रहण समारोह में शामिल होंगे। वे 17 नवंबर को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के बाद उसी रात वापस दिल्ली आ जाएंगे।
भारत ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा को नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत बताया है। माना जा रहा है कि मालदीव में नई सरकार के गठन के बाद भारत-मालदीव रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश भी तेज होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मालदीव के नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में शामिल होने का न्यौता नेबरहुड फर्स्ट नीति को ध्यान में रखते हुए सहर्ष स्वीकार कर लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत मालदीव के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाने और साथ मिलकर काम करने के लिए आशान्वित है। गौरतलब है कि मालदीव से पिछले कुछ सालों में रिश्तों में काफी खटास आ गई थी।
चीन का दखल बढ़ने के साथ ही भारत की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। भारतीयों से भेदभाव, उन्हें वीजा और रोजगार न देने के मामलों में दोनों देशों के रिश्तों में दरार पैदा कर दी थी। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को चीन का समर्थक माना जा रहा था। भारत और अमेरिका के विरोध के बावजूद यामीन ने मालदीव में आपातकाल लागू करके विपक्षी दलों के नेताओं को जेल भेज दिया था।
हाल में हुए चुनाव में यामीन को संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में सोलेह ने पराजित किया था। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि सोलेह की अगुवाई में भारत और मालदीव के रिश्ते फिर से बेहतर होंगे। जानकार चीन का दखल सीमित होने की उम्मीद भी जता रहे हैं क्योंकि चुनावों में यह बड़ा मुद्दा था।
प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के राष्ट्रपति के शपथग्रहण में होंगे शामिल

