सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: 1962 में भारत- चीन युद्ध लड़ने वाले एक मेजर की जीवंत कॉमेंट्री 
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
state

1962 में भारत- चीन युद्ध लड़ने वाले एक मेजर की जीवंत कॉमेंट्री 

Last updated: June 27, 2020 7:25 pm
Surabhi Saloni
Share
6 Min Read
SHARE
  • मेजर ओंकारनाथ ने 16 गोलियां खाकर छुड़ाए चीनी फौज के छक्के
  • भारतीय सेना थ्री- नॉट- थ्री के भरोसे लड़ रहीं थी चीनी से युद्ध
  • भारत- चीन लड़ाई में लद्दाख की नामकाचू नदी का पानी हो गया था लाल,
  • भारत से आमने- सामने के युद्ध में कभी नहीँ जीत सकता है चीन

प्रभुनाथ शुक्ल/भदोही। राजपूत रेजीमेंट के सेकंड लेफ्टिनेंट रहे मेजर ओंकार नाथ दुबे के जेहन में 58 साल पूर्व भारत- चीन के बीच लड़े गए युद्ध की यादें आज भी ताजा हैं। 21 साल की उम्र में इस जांबाज़ ने सीने में 16 गोलियाँ खाकर भी दुश्मन फौज के दाँत खट्टे कर दिए थे। घायल होने की वजह से उन्हें समय से पहले सेना से 1980 में रिटायर कर दिया गया। मेजर के सीने में 1962 के जख्म आज भी हरे हैं। भारत कुछ गलतियों की वजह से यह लड़ाई जीत कर भी हार गया था। उस दौर में भारतीय सेना बटालियन सिर्फ़ एक- एक एलएमजी और थ्री- नॉट- थ्री के भरोसे शत्रु फौज से लड़ती थी। गलवान की घटना पर उन्होंने दुःख जताया। धोखेबाज़ चीन से हमेशा सतर्क रहने को कहा।

थ्री- नॉट- थ्री रायफल से लड़ा था चीन के खिलाफ युद्ध
भदोही जिले के औराई के विक्रमपुर गांव निवासी मेजर ओंकारनाथ दुबे एक गौरव हैं। वह भाजपा नेता शैलेन्द्र दुबे  उर्फ टुन्ना के चाचा हैं। 1962 में भारत- चीन युद्ध में मेजर ने अहम भूमिका निभाई थी। भारत- चीन सीमा पर अरुणाचल के नामचाकू घाटी में यह युद्ध लड़ा गया था। इसे ऑपरेशन ओंकार के नाम से भी जाना जाता है। मेजर बताते हैं कि उस दौरान भारतीय सैनिकों के पास आज की तरह आधुनिक युद्धपोत, टैंक, लड़ाकू विमान, इंसास रायफल और आधुनिक संचार की सुविधा नहीँ थी। सिर्फ़ थ्री- नॉट- थ्री रायफल के भरोसे सेना युद्ध लड़ रहीं थी। लद्दाख में नामचाकू की लड़ाई सबसे भीषण थी। दोनों तरफ़ से काफी सैनिक हताहत हुए थे। नामचाकू नदी का पानी ख़ून से लाल हो गया था। यह लड़ाई 20 अक्टूबर को शुरू हुई थी।

मेजर ने सीने में खाई थीं 16 गोलियां, आज भी जख्म हैं हरे
मेजर ओंकार ने बताया कि 1962 में भारत- चीन के बीच  नामकाजू घाटी में युद्ध लड़ा गया था। यह जंग  72 घंटे तक चली थी। भारतीय फौज ने चार हजार चीनी सैनिकों को ढेर कर दिया था। उन्होंने बताया कि वह ख़ुद अंत तक चीनी सेना से एक एलएमजी और थ्री- नाट- थ्री जैसे साधारण हथियार से लोहा ले रहे थे। मेजर ने बताया कि युद्ध के दौरान जब गोलियां खत्म हो गई तो 300 की संख्या में चीन की सेना के जवानों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां दाग कर घायल कर दिया और हवलदार रोशन सिंह के साथ मुझे 24 घंटे बाद बंदी बना लिया। बंदी सैनिकों की अदला बदली के बाद वह रिहा हुए थे। उस दौरान 16 गोलियां लगने से नामकाचू घाटी में घायल पड़े रहे। गोलियां दाहिने तरह लगी थी इसलिए बच गया।

पुस्तक ‘हिमालयन ब्लंडर’ में इस युद्ध का है उल्लेख
मेजर ओंकाननाथ ने बताया कि 1962 के युद्ध में ना ही उनके पास समुचित हथियार थे और ना ही आज के जैसी का कुशल नेतृत्व वाली सरकार। आज जैसी स्थिति होती तो वह चीनी सैनिकों को बीजिंग और शंघाई तक खदेड़ देते। उन्होंने दावा किया कि युद्ध के दौरान रसद और गोलियां ख़त्म हो गई तो जिस जहाज से रसद और युद्ध सामन भेजा गया उसने बहोत बड़ी गलती कर दिया। उसने रसद एक तरफ़ गिरा दिया जबकि हथिया दूसरी तरफ़। जिसकी वजह से हम यह जंग हार गए। मेजर ने बताया कि चीन के साथ अरूणांचल के नामकाचू वैली की इस जंग को जेपी डालवी की पुस्तक हिमालयन ब्लंडर और रिवर आफ साइलेंस में विस्तार से जाना जा सकता है। भदोही का यह वीर सपूत 1962 के साथ 1965 और वर्ष 1971 में पाकिस्तान से हुई जंग में भी दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे।

भारतीय फौज को दिया संदेश बीजिंग पर लहराना तिरंगा
मेजर ओंकारनाथ दुबे दावा करते हैं कि 1962 में मोदी सरकार होती तो बीजिंग पर भारतीय सेना तिरंगा लहराता नजर आता।  हमारे एक- एक जवान के खिलाफ़ चीन के पांच- पांच जवान होते थे। क्योंकि भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम से चीनी सेना डर गई थी। जिसकी वजह से पांच- पांच जवानों की संख्या के झुंड बनाकर हमला करते थे। जबकि भारतीय फौज आज भी एक पर तीन जवान का टारगेट रखती है। जबकि चीनी एक पर पांच से दस का  टारगेट रखते हैं। गलवान ने चीन ने यहीं नीति अपनाई। मेजर का दावा है कि चीन की सेना आमने- सामने के युद्ध में भारतीय फौज का मुकाबला नहीँ कर सकती है। 82 वर्षीय मेजर ओंकारनाथ दुबे ने भारतीय सैनिकों को संदेश दिया है कि खून की अंतिम  बूंद तक मेरी तरह गोली भलें सीने पर खाना, लेकिन बीजिंग पर भारतीय तिरंगा अवश्य लहराना। भारत और उसके सैन्य गौरव का अभिमान हमेशा ध्यान में रखना।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love1
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article भदोही : इंटरमीडिएट में आकाश मौर्य, हाईस्कूल में सपना और चांदनी किया टॉप
Next Article राजश्री शाहू जयंती के मौके पर चांदीवली में रक्तदान शिबिर

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

खाद की दुकानों पर छापेमारी, 11 नमूने लिए गए; तीन दुकानों के लाइसेंस निलंबित
state
October 24, 2026
मनीष मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग, आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप पर लामबंद हुए कांग्रेसी
state
October 23, 2026
25 अक्टूबर को शाम 7 बजे, हर घर धुरंधर! रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ का पहली बार फ्रीडिश दर्शकों के लिए स्टार उत्सव मूवीज़, कलर्स सिनेप्लेक्स बॉलीवुड और कलर्स सिनेप्लेक्स सुपरहिट्स पर प्रीमियर
entertainment Mumbai / Maharshtra
October 23, 2026
अरुणाचल प्रदेश में चीन की PLA के साथ कई स्थानों पर टकराव जारी, ITBP महानिदेशक का बड़ा बयान
national
October 23, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?