‘घोषणाओं पर महापौर का हक, कमिश्नर का नहीं’

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मुंबई:बीएमसी में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। चुनावी वर्ष में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की घोषणा से पहले महापौर ने कमिश्नर को पत्र लिखकर सरकार के सर्कुलर की याद दिलाई है।
महानगर के प्रथम नागरिक होने के नाते विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी प्रेस के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का अधिकार महापौर का है। ऐसे में आगे से इस तरह के फैसले महापौर के माध्यम से ही घोषित करने का निर्देश भी उन्होंने दिया है। अगले कुछ महीनों में कोस्टल रोड, साइकल ट्रैक, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट समेत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की असल या उनके काम की शुरुआत की जानी है। आसन्न लोकसभा और विधानसभा चुनाव के चलते शिवसेना इसकी घोषणाओं का पूरा श्रेय लेना चाहती है।
गौरतलब है कि कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी अधिकारियों के माध्यम से दिए जाने को लेकर कई नेता पहले भी तल्खी दिखा चुके हैं। कमिश्नर के दफ्तर से भी नई घोषणाओं को लेकर भौंहे तानी गई हैं। इससे पहले भी महापौर कार्यालय की बैठक की जानकारी बाहर किए जाने को लेकर उन्होंने तीखे सवाल पूछे गए थे। महापौर ने लोकप्रतिनिधियों के महत्व को याद दिलाते हुए 2001 में शहरी विकास मंत्रालय के सर्कुलर की याद दिलाई है।
राजनीतिक समीकरण
राज्य सरकार में नंबर 2 की भूमिका निभा रही शिवसेना की सबसे महत्वपूर्ण नब्ज बीएमसी की सत्ता है। 2017 में हुए बीएमसी चुनावों में बेहद मजबूत होकर उभरी भाजपा के चलते अब उसे यहां भी खतरा महसूस होने लगा है। फिर पूर्व के कमिश्नर के विपरीत अजय मेहता की वक्ता की छवि से अक्सर मीडिया में जगह बना लेते हैं। ऐसे में, मुंबई संबंधी घोषणा के लिए मीडिया में अपनी पहुंच बनाने की कोशिश के राजनीतिक मायने भी बहुत हैं। इससे पहले भी महापौर निवास पर कमिश्नर समेत तमाम आईएएस अधिकारियों के नेत्तृव में कार्य समीक्षा की जाती रही है, लेकिन इसे मीडिया में अधिक जगह नहीं मिल पाती है।

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