कैसे सरकारी इंजीनियर से संत बना रामपाल

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रामपाल का जन्म हरियाणा के सोनीपत में गोहाना के धनाना गांव में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद रामपाल को सरकारी नौकरी मिल गई। वह हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई और वह उनका शिष्य बन गया। रामपाल कबीर पंथ को मानने लगा। 1995 में रामपाल ने सरकारी नौकरी छोड़ दी और सत्संग करने लगा। इस दौरान रामपाल के अनुयायियों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ रही थी।
खड़ा किया विशाल सतलोक आश्रम
एक महिला ने करोंथा गांव में रामपाल को आश्रम के लिए जमीन दे दी। इसके बाद 1999 में रामपाल ने सतलोक आश्रम की नींव रखी।
2006 में भड़की हिंसा
2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर रामपाल ने एक विवादित टिप्पणी की। आर्यसमाज के अनुयायियों ने टिप्पणी के खिलाफ विरोध जताया। दोनों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक शख्स की मौत भी हो गई। 2006 में प्रशासन ने आश्रम को कब्जे में ले लिया। लेकिन 2009 में संत रामपाल को आश्रम वापस मिल गया।
2013 में आर्य समाजियों और संत रामपाल के समर्थकों में एक बार फिर झड़प हुई। इस हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई, करीब 100 लोग घायल हो गए।
कोर्ट में पेश नहीं हुआ रामपाल और फिर चला ऑपरेशन
नवंबर 2014 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी रामपाल कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद हाईकोर्ट ने रामपाल को पेश करने के आदेश दिए और पुलिस प्रशासन ने सतलोक आश्रम से रामपाल को निकालने के लिए ऑपरेशन चलाया। तब आश्रम में हजारों अनुयायी थे। इस दौरान रामपाल समर्थकों और पुलिस में झड़प हुई। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने रामपाल को जबरन आश्रम से बाहर निकालकर गिरफ्तार किया था।
इन मामलों में हो चुका है बरी
रामपाल को सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने और रास्ता रोक कर लोगों को बंधक बनाने के दो मामलों में हिसार की जिला अदालत ने बरी कर दिया था। 2014 में सतलोक आश्रम में हुए बवाल के बाद से ही रामपाल हिसार सेंट्रल जेल में बंद है। हालांकि उसके अनुयायियों की संख्या में कमी नहीं आई है। आज भी उसके अनुयायी जेल के बाहर जाकर माथा टेकते हैं। हिसार जेल एक तरह से धाम बन गया है।
11 अक्टूबर को दोषी करार
हिसार में नवम्बर 2014 में रामपाल से जुड़े बरवाला के सतलोक आश्रम में हत्‍या के दो मामलों में कोर्ट ने रामपाल दोषी करार दिया। रामपाल पर दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे। एक केस में रामपाल और उसके 14 समर्थकों और दूसरे केस में रामपाल और उसके 13 समर्थकों को आरोपी बनाया गया था। रामपाल समेत सभी आरोपी हत्या के दो मामलों में दोषी करार दिए गए।

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