अमेरिका से ट्रेड वॉर के बीच चीन ने भारत की तरफ बढ़ाया दोस्ती का हाथ

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 नई दिल्ली: अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड वॉर के बीच चीन ने ट्रेड प्रॉटेक्शनिज्म यानी संरक्षणवाद से लड़ने के लिए बुधवार को भारत से हाथ मिलाने की पहल की। अमेरिकी अधिकारियों ने भी हाल में आपसी संबंध सुधारने के लिए बीजिंग का दौरा किया था। दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देशों चीन और भारत की अर्थव्यवस्था अहम पड़ाव पर है।
अधिकारियों ने कहा कि चीन और भारत दोनों की भलाई इसमें है कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और मुफ्त व्यापार व्यवस्था को बचाया जाए। राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और मुक्त व्यापार की रक्षा के लिए एकसाथ आवाज उठाई थी। अधिकारियों ने दावा किया कि इस मामले में चीन और भारत के एक साथ खड़े होने की कई वजहें हैं।
पिछले शुक्रवार को भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने ट्रेड प्रॉटेक्शनिज्म पर चिंता जाहिर की थी। उनके संयुक्त बयान के मुताबिक, ‘दोनों पक्ष (भारत-रूस) खुले, समावेशी, पारदर्शी, भेदभाव से रहित और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों और संरक्षणवाद को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
हाल में चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की चिंता जाहिर की जा रही है। पोम्पियो ने इसी सोमवार को चीन का दौरा किया था। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पॉलिटिकल ब्यूरो के मेंबर और सीपीसी केंद्रीय समिति के विदेश मामलों के आयोग के कार्यालय के निदेशक यांग जिची और स्टेट काउंसिलर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने उनसे अलग-अलग मुलाकात की। दोनों पक्षों ने चीन-अमेरिका संबंधों सुचारू रूप से चलाने के लिए विचार-विमर्श किया।
‘अमेरिका चीन के विकास के खिलाफ नहीं’
इकनॉमिक टाइम्स को जानकारी मिली है कि पोम्पियो की यात्रा के दौरान चीन ने जोर देकर कहा कि चीन-अमेरिका संबंध अब एक अहम मोड़ पर हैं और आपसी सहयोग से ही दोनों देशों को फायदा हो सकता है। उन्होंने पोम्पियो से कहा कि चीन अपनी संप्रभुता की रक्षा और विकास को जारी रखने के लिए सारे जरूरी उपाय करेगा। इस पर पोम्पियो ने कहा कि अमेरिका और चीन के भले ही कई मुद्दों पर आपसी मतभेद हैं, लेकिन अमेरिका, चीन के विकास के खिलाफ नहीं है। चीन ने ट्रेड वॉर के चलते अमेरिकी उत्पादों पर ड्यूटी काफी बढ़ा दी है। इसे भारत के लिए चीन के साथ व्यापार घाटा कम करने के मौके के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इसके लिए भारत को प्रतिस्पर्धात्मक कीमतों के साथ चीन के बड़े बाजार में पहुंच बनानी होगी।

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