पुणे में बारह व्रत दीक्षा कार्यशाला संपन्न

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चेतना काऊर्ध्वारोहण का मार्ग है, व्रत दीक्षा: मुनि जिनेश कुमार
पुणे। आचार्य श्री महाश्रमण जी के शिष्य मुनि जिनेशकुमार जी के सानिध्य में तथा अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशानुसार और स्थानीय युवक परिषद के द्वारा स्वयंवर मंगल कार्यालय में 12 व्रत दीक्षा कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुनि जिनेशकुमार ने “आओ जीवन को संवारे व्रत दीक्षा से” विषय पर प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जन्म के साथ जीवन प्रारंभ होता है मरण के साथ जीवन का समापन होता है। जन्म और मरण के बीच की अवस्था का नाम जीवन है। जीवन को संवारने के लिए व्रत की पूर्ण अपेक्षा रहती है। व्रत स्व को स्व से जोड़ने की प्रक्रिया है। व्रत से व्यक्ति आत्मा अनुभूति करता है। व्रत गाड़ी में ब्रेक के समान है। व्रत से आर्थिक उन्माद पर नियंत्रण होता है। मुनि ने आगे कहा जीवन की दो वृत्ति है – निवृत्ति और प्रवृत्ति। असंयम से निवृत होना संयम में प्रवृत्त होना यही जीवन वृति है। संयम में प्रवृत्त होने के लिए व्रत की उपयोगिता है। व्रत दीक्षा का अर्थ है असंयम से संयम की ओर प्रस्थान करना। मुनि ने आगे कहा अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पांच महाव्रत है। महाव्रत की साधना साधु करते हैं, अहिंसा आदि 12 वर्षों की साधना श्रावक करते हैं। गृहस्थ संसार से मुक्त नहीं हो सकता लेकिन संसार में रहकर सीमाकरण तो कर सकता है। सीमाकरण करने से व्यक्ति अनावश्यक हिंसा, झूठ, चोरी आदि से बच सकता है। रहन-सहन, खान-पान की स्वस्थता से व्यक्ति चेतना का ऊर्ध्वारोहण कर सकता है।
व्यक्ति को सामायिक, दान आदि छोटे-छोटे नियमों की साधना करनी चाहिए जिससे व्यक्ति का अव्रत रुक जाएगा और वह संसार का सीमाकरण कर सकता है। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता बेंगलुरु से समागत तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के पूर्व अध्यक्ष CA संजय धारीवाल ने “व्यापार सफलता के मंत्र अहिंसा अनेकांत और अपरिग्रह के साथ” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जैन दर्शन के सूत्रों को व्यापार के साथ जोड़ा जा सकता है।
जैन दर्शन में खमतखामणा का विधान है। अपनी गलती स्वीकार करना, सत्य को स्वीकार करना, क्षमा मांगना व क्षमा देना, यह व्यापार की उन्नति का बहुत बड़ा मार्ग है। उन्होंने अहिंसा अनेकांत व अपरिग्रह के सूत्रों की चर्चा करते हुए व्यापारिक सफलता के मंत्र बताएं। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के प्रकाशन प्रभारी मनोज संकलेचा ने कार्यशाला के प्रति मंगल भावना व्यक्त की। इस अवसर पर स्वागत भाषण तेयुप अध्यक्ष दिनेश खिवेंसरा, मंगलाचरण जयदेव सेठिया ने किया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी, विजय कोठारी, आचार्य श्री तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष लूणकरण छाजेड़, तेरापंथ सभा, पिंपरी-चिंचवड़ के अध्यक्ष कर्ण सिंघी, डॉ. ज्योति डूंगरवाल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। आभार ज्ञापन तेयुप मंत्री धर्मेंद्र चोरड़िया ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया। इस कार्यशाला में इचलकरंजी, जयसिंहपुर, पिंपरी-चिंचवड़, माधवनगर, सोलापुर आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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