उप्र : शहीद उप उपनिरीक्षक नेबू लाल को नम आँखों से पिता ने दी मुखाग्नि

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  • भदोही के सीतामढ़ी गंगा घाट पर शहीद सब इंसपेक्टर के अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
  • भदोही सांसद रमेश बिंद, हंडिया विधायक हाकिमचंद बिंद और भदोही के डीएम- एसपी भी रहे मौजूद

प्रभुनाथ शुक्ल/भदोही। कानपुर मुठभेड़ में शहीद एसआई नेबू लाल का शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ सीतामढ़ी के गंगा घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। बिलखते हुए पिता ने बेटे को मुखाग्नि दिया। इस दौरान भदोही और प्रयागराज के आलाधिकारी के साथ भदोही सांसद रमेश बिंद और हंडिया विधायक हाकिमचंद बिंद भी मौजूद रहे। काफी संख्या में मौजूद लोग नेबू लाल अमर रहे का नारा लगा रहे थे।
कानपुर मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मी और अफसरों में एसआई नेबू लाल भी मौजूद थे। वह प्रयागराज जिले के हंडिया कोतवाली के भीटी गाँव के निवासी थे। शहीद इंसपेक्टर के शव को ट्रैक्टर पर सजा कर लाया गया था। इस दौरान काफी संख्या में लोग और सगे- संबंधी शहीद नेबू लाल को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े थे। इंसपेक्टर का शव लगभग 11: 50 बजे सीतामढ़ी श्मशान घाट पहुँचा। 11: 55 पर भदोही पुलिस के जवानों की तरफ़ से शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इस दौरान भदोही सांसद रमेश बिंद और हंडिया विधायक हाकिमचंद बिंद ने भी शहीद इंसपेक्टर अंतिम यात्रा में शामिल हुए। सांसद ने कहा कि शहीद के परिजनों को पूरी मदद मिलेगी। सरकार दोषियों को कभी माफ नहीँ करेगी। यूपी पुलिस और नेबू लाल की शहादत बेकार नहीँ जाएगी। इस मौके पर भदोही जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद, एसपी राम बदन सिंह , ज्ञानपुर क्षेत्राधिकारी कालू सिंह भी मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के समय महौल बेहद ग़मगीन था। परिजन बिलख रहे थे।
सीतामढ़ी श्मशान घाट पर तकरीब 12:10 मिनट पर सबइंस्पेक्टर नेब्बू लाल बिंद को मुखागनी उनके पिता काली प्रसाद बिंद ने दी। इस मौके पर कांग्रेस के नेता राजेश दुबे के अलावा एसपी व बीएसपी के नेता भी मजूद रहे। इंसपेक्टर कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई टीम का हिस्सा थे।
इस मुठभेड़ में एक क्षेत्राधिकारी, तीन एसआई समेत चार पुलिस वाले शहीद हुए हैं। पुलिस टीम बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई थीं, लेकिन इसकी भनक विकास और उसके साथियों को पहले लग चुकी थीं। पुलिस टीम जैसे ही विकास को पकड़ने उसके घर पहुँची घाट लगाए बदमाशों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जिसकी वजह से पुलिस के आठ जांबाज़ शहीद हो गए।

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