मातृभूमि पहुंचकर ट्रेन से उतरे, तो खिल उठे प्रवासियों के चेहरे

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  • मुंबई में भयंकर कोरोना संक्रमण से मौत का डर
  • अपना सब कुछ छोड़ गांव पहुंचे डरे हुए प्रवासी
  • परिवार को बचाने का सुकून झलका चेहरे पर

सिरोही, पाली, जयपुर। मुंबई से स्पेशल ट्रेन द्वारा आज राजस्थान में अपनी मातृभूमि पहुंचे लोगों के चमकते चेहरों पर छाई खुशी देखने लायक थी। सिरोही जिले के पिंडवाड़ा, पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन एवं जयपुर में आज जब प्रवासियों को लेकर यह स्पेशल ट्रेन पहुंची, तो रेल्वे स्टेशन पर उतरते ही प्रवासियों के चेहरे खिल उठे थे। मुंबई में कोरोना संक्रमण से खुद को एवं अपने परिवार को बचाने के लिए वहां अपना सब कुछ छोड़कर अपने गांव पहुंचने का सुकून उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था। मुंबई में परेशानी झेल रहे 1287 जरूरतमंद प्रवासी राजस्थानियों को लेकर यह स्पेशल ट्रेन शुक्रवार को राजस्थान पहुंची।

स्पेशल ट्रेन में स्पेशल व्यवस्था
रोजगार खत्म होने का कारण परेशान लोग कैसे भी करके मुंबई शहर से निकलकर अपने गांव पहुंचना चाहते हैं। इस परेशानी को समझा मुंबई के विधायक मंगल प्रभात लोढा ने। उन्हीं के प्रयासों से इस ट्रेन की सुविधा हो पाई। विशेष ट्रेन से राजस्थान पहुंचे यात्रियों में से पिंडवाड़ा में 702 मारवाड़ जंक्शन में 324 एवं जयपुर में 261 यात्री उतरे। सभी प्रवासियों ने स्पेशल ट्रेन में यात्रियों के लिए विशेष सुविधा के लिए विधायक लोढ़ा का आभार जताय़ा है। बांद्रा स्टेशन पर सभी प्रवासियों को मास्क, पानी, सेनेटाइजर एवं रात के भोजन की व्यवस्था तथा मेहसाणा में उनके लिए सुबह के नाश्ते का प्रबंध करने के लिए यात्रियों ने विधायक लोढ़ा को धन्य़वाद दिया है।

मुंबई में कोरोना से हाहाकार
बीते दो 2 महीने से लगातार चल रहे सख्त लॉकडाउन के कारण मुंबई में काम धन्धा पूरी तरह ठप है। प्रवासी राजस्थानी समाज एवं सरकार के बीच सेतु का काम कर रहे राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार ने बताया कि मुंबई में प्रवासी परेशान हैं। कमाई शून्य और खर्चा ज्यादा होने के साथ ही घरों में कैद प्रवासी राजस्थानी कोरोना के बढ़ते संक्रमण से भी डरे हुए हैं, इसलिए वे हर हाल में घर जाना चाहते हैं। देश की आर्थिक राजधानी से कोरोना की राजधानी में तब्दील हो चुके मुंबई में बीते कुछ दिनों से रोज 40 के आसपास लोगों मर रहे हैं। मरनेवालों की कुल संख्या नौ सो के पार होने के साथ ही मरीजों की संख्या भी 26 हजार के पार पहुंच गई है। विदेशों में फंसे प्रवासी राजस्थानिंयों की भारत वापसी में भी इन दिनों राजस्थान सरकार के जरिए अहम भूमिका निभा रहे निरंजन परिहार के मुताबिक लगातार बदतर होते मुंबई के हालात से डरकर प्रवासी राजस्थानी अपनी मातृभूमि का रुख कर रहे है। उन्होंने बताया कि प्रवासियों के मन में सबसे बड़ा डर कोरोना संक्रमण का ही है क्योंकि रोज करीब 1500 लोगों को कोरोना अपनी चपेट में ले रहा हैं।

चेहरों पर दिखी खुशी की लहर
स्पेशल ट्रेन से उतरनेवाला हर चेहरा खुशी से चमका हुआ था। यात्रियों के चेहरों पर कोरोना संकट में फंसे मुंबई शहर को छोड़ने की खुशी साफ झलक रही थी। अपनी मातृभूमि पहुंचकर स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे स्पेशल ट्रेन से पिंडवाड़ा में उतरे शिवगंज निवासी हरीश सुथार ने कहा कि वे दो महीने से मुंबई में सपरिवार फंसे हुए थे। यह स्पेशल ट्रेन उनके लिए भगवान बनकर आई। झुंझुनू के सहीराम गावडिया जयपुर में स्टेशन पर उतरते ही जमीन चूमकर हाथ जोड़े खडे रहे और मुंबई में हर रोज कोरोना से मरनेवालो की संख्या बढ़ती देखकर अपने परिवार को बचाने के लिए भगवान का आभार जताया। मारवाड़ जंक्शन पहुंचे राहुल कुमावत ने कोरोना संकट में मुंबई से निकालने एवं इस स्पेशल ट्रेन को चलाने के लिए राजस्थानी समाज के नेता मंगल प्रभात लोढा, रेलमंत्री पीयूष गोयल तथा निरंजन परिहार का आभार जताया।

राजस्थान के 19 जिलों में आए प्रवासी
मुंबई से 21 मई की रात को निकलकर 22 मई को पहुंची इस स्पेशल ट्रेन में राजस्थान के 19 जिलों के कुल 1287 प्रवासी अपने वतन पहुंचे हैं। प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण की वजह से बाहर से आनेवालों को लेकर विशेष एहतियात बरती जा रही हैं। हालांकि सभी प्रवासी अपना चिकित्सा प्रमाण पत्र साथ में लेकर मारवाड़ पहुंचे हैं, लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर प्रशासन उनकी ट्रेवल हिस्ट्री एवं स्थानीय निवास के बारे में सावधानी बरत रहा है। सिरोही, पाली, जालोर, उदयपुर, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं बाड़मेर के कुल 702 प्रवासी पिंडवाड़ा उतरे। मारवाड़ जंक्शन पर पाली, जोधपुर व राजसमंद जिलों के 324 प्रवासी उचरे। इसके बाद बीकानेर, चुरू, सीकर, झुंझुनू, जयपुर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, कोटा, दौसा एवं सवाई माधोपुर के 261 यात्री जयपुर उतरे। प्रशासन द्वारा सभी को राजस्थान रोड़वेज की बसों से अपने गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

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