चैत्र नवरात्रि 2020 : महामारी नाश करने का मंत्र

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कोरोना वायरस के चलते नवरात्र पर आपको विशेष सावधानी ऱखनी होगी। देवी शास्त्र में एकांत पूजा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वो भी रात्रिकालीन पूजा को। देवी भगवती की आराधना में पहलेदिन यानी शैलपुत्री दिवस ( प्रथम नवरात्र) को वातावरण की शुद्धि के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं। जैसे तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। यह शैलपुत्री की मुख्य उपासना होगी। यूं कलश स्थापना परिवारीजन के साथ होती है। लेकिन जब परिस्थिति कोरोना वायरस जैसी हो तो आपको कुछ सावधानी भी रखनी होगी। जैसे, घर का मुखिया स्वयं संकल्प ले। यह संकल्प अपने परिवार की निमित वह स्वयं कर सकता है लेकिन संकल्प करते हुए वह अपनी मां-पिता, पत्नी और बच्चों का नाम ले। अन्यथा सपरिवारम संकल्प लेते हुए संकल्प ले। संकल्प से पूर्व सभी परिवारीजन अपने हाथ में पीले चावल लेकर बैठें और अर्पित कर दें। सब लोग अपने आगे एक कटोरी रख लें और उसमें चावल छोड़ दें। कलश स्थापना के समय पर्याप्त दूरी बनाकर रखें। किसी प्रकार यह संभव न हो तो घर का मुखिया ही संकल्प कर ले। व्रत का फल मिलेगा। इसी प्रकार अग्यारी या यज्ञ का भी ध्यान रखें।

यदि कलश स्थापना के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं जुटा सके हो तो आप यह कर सकते हैं….

-नारियल न हो तो सुपारी

-सुपारी न हो तो कोई चांदी का सिक्का

-यदि यह भी न हो तो लोंग देवी जी के आगे रख दें

सूक्ष्म विधि

-एक पात्र में गंगाजल मिश्रित जल का पात्र रखें और सात बार कलावा बांध दें। उस पर एक तश्तरी में पीली सरसो, काले तिल, लोंग, सुपारी रख दें।

 

महामारी से बचने को इस मंत्र से करें कलश स्थापना
“रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥” (अ॰११, श्लो॰ २९)

अर्थ :- देवि! तुम प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हो और कुपित होने पर मनोवाञ्छित सभी कामनाओं का नाश कर देती हो। जो लोग तुम्हारी शरण में जा चुके हैं, उन पर विपत्ति तो आती ही नहीं। तुम्हारी शरण में गये हुए मनुष्य दूसरों को शरण देनेवाले हो जाते हैं।

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं चामुण्डायै विच्चे

अकेले करें पूजा, समूह से बचें

(श्रीदुर्गा सप्तशती में महामारी का उल्लेख है। महामारी नाश और आरोग्यता के लिए संपूर्ण देवी पाठ है। विधि-विधान से नहीं हो पाए तो सूक्ष्म में यह करें…

1.  देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलकम, सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ ( कीलकम् और कवच का पाठ अधिक करें)

2.  देहि सौभाग्यम-आरोग्यम देहि मे परमं शिवम् का जाप करें

3.  जाप बोलकर नहीं करें क्यों कि कोरोना वायरस फैल रहा है

4.  इस बार मानसिक पूजा करें।

5.  एकांत पूजा करें। सामूहिक एकत्रीकरण से बचें

6.  परिवारीजन दूर-दूर बैठें या घर का मुखिया सभी का नाम लेते हुए घट स्थापना कर दे

7.  किसी भी बीमार व्यक्ति को पूजा में सम्मिलित न करें

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