सुगति के लिए ज्ञानी की करे सेवा : आचार्य महाश्रमण

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लगभग 13 किलोमीटर विहार कर शांतिदूत पहुंचे मंगलवेढ़ा
आचार्य श्री के चरण स्पर्श अनिश्चितकालीन बंद

18-03-2020, बुधवार, मंगलवेढा, सोलापुर, महाराष्ट्र। तीर्थंकर प्रभु भगवान महावीर के प्रतिनिधि अहिंसा यात्रा प्रणेता करुणासागर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज प्रभात वेला में आंधल गांव से मंगल विहार किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में चींटियां नजर आ रही थी। ऐसे में अहिंसा के धारक आचार्यवर अपना एक-एक कदम सावधानी पूर्वक रखकर धीमे चल रहे थे। अपने आराध्य के करुणामय रूप को देख सभी नतमस्तक हो उठे। विहार के दौरान एक ओर जहां निर्माणाधीन होने के कारण सड़क मार्ग उबड़-खाबड़ था वही ऊपर से चिलचिलाती धूप अपनी उस्मा प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। दोनों के मध्य अपनी यात्रा के साथ आचार्य श्री महाश्रमण समत्वभाव से विहार कर रहे थे। लगभग 13 किलोमीटर पदयात्रा कर गुरुदेव मंगलवेड़ा गांव में श्री संत दामाजी महाविद्यालय में पधारे।
प्रवचन सभा में मंगल उद्बोधन प्रदान करते हुए ज्योतिचरण ने कहा–दुनिया में ज्ञान एवं ज्ञानी का बहुत महत्व होता है। ज्ञान एक पवित्र तत्व है और ज्ञानी उस पवित्र तत्वों से युक्त। अगर हमें अपना हित साध ना हो वर्तमान जीवन अच्छा रहे और अगला जन्म भी अच्छा हो, सुगति की कामना तो शास्त्रों में कहा गया कि बहुश्रुत की पर्युपासना करो, सेवा करो। जिसके पास बहुत सारे विषयों का ज्ञान होता है वह बहुश्रुत होता है। आदमी गुरु हो सकता है तो एक अंश में पुस्तकें, ग्रंथ भी गुरु हो सकते हैं। ग्रंथ से भी ज्ञान मिलता है, इसलिए व्यक्ति को पढ़ना चाहिए ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि दुनिया में ज्ञान अनंत है न जाने कितने-कितने ग्रंथागार पुस्तकों से भरे हुए हैं। ज्ञान अधिक और जीवन कम है। सारी पुस्तकें अपने जीवन काल में कोई नहीं पढ़ पाए। ऐसे में व्यक्ति को सारपूर्ण ज्ञान ग्रहण करना चाहिए। जैन आगम दसवेआलियं ग्रंथ है जिसमें महाव्रत, चर्या, गोचरी आदि अनेक विषय समाहित है। अनेकों चारित्र आत्माएं भी उसका चितारना, परावर्तन करते रहते हैं। तो व्यक्ति ज्ञानी पुस्तकों से भी ज्ञान प्राप्त करें और ज्ञानी त्यागी गुरु मिल जाए तो कहना ही क्या। हमारा जीवन ज्ञानपूर्ण बने, यह काम्य है।
आचार्य श्री के चरण स्पर्श अनिश्चितकालीन बंद
विश्व भर के साथ-साथ भारत में भी फैल रहे कोरोनावायरस के चलते अनिश्चितकाल के लिए आचार्य श्री के चरण स्पर्श बंद किये गए है। सभी श्रावक समाज ध्यान रखें सेवा उपासना एवं दर्शन का समय नियमित प्रकार से चलता रहेगा।

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