कोरोना से करुणामयी हुआ बाजार

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आदित्य तिक्कू।।
विश्व भर में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 150,000 से अधिक हो गई है। इस संक्रमण से अब तक 137 देशों में 5,764 मौतें हुई हैं। आप जब तक यह लेख पढ़ेंगे, तब तक कोरोना वायरस की चपेट में और ज़िंदगिया आ चुकी होंगी। कोरोना वायरस अब तेज़ी से आर्थिक स्थिति को भी ग्रहण लगाती जा रही है। कोरोना से विश्व भर के बाजार जिस तरह से धराशायी हो रहे हैं, उससे निवेशकों से लेकर सरकारों तक की नींद उड़ जाना स्वाभाविक था। हमारे लिए यह ज्यादा चिंता की बात इसलिए भी है कि देश पिछले सवा साल से आर्थिक सुस्ती का शिकार है और माना जा रहा था कि इस साल हालात कुछ नियंत्रण में आएंगे। लेकिन तब यह ज्ञात नहीं था कि कोरोना जैसा कोई संकट आ जाएगा और लोगों के साथ बाजार, कारोबार भी इससे प्रभावित होने लगेगा। देश दुनिया के लिए पिछला हफ्ता सबसे ज्यादा खराब रहा। गुरुवार को बंबई शेयर बाजार में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली और बीएसई सूचकांक 2919 अंक गिर कर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार को बीएसई सूचकांक में 1942 अंक की गिरावट आई थी। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक हजार एक सौ अस्सी कंपनियों के शेयर साल भर के निचले स्तर पर आ गए हैं। शेयर बाजार में इस तरह की भारी गिरावट के पीछे बड़े कारण होते हैं जो निवेशकों में कहीं न कहीं भय और आशंकाएं पैदा कर देते हैं। ऐसे में निवेशक किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं और इससे बाजार में अफरा-तफरी मच जाती है। सिर्फ भारत के शेयर बाजारों ही नहीं, दुनिया के ज्यादातर बड़े शेयर बाजार इसी रास्ते पर हैं। फरवरी के आखिर से ही बाजार पर कोरोना का असर दिखने लगा था और इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि आने वाले दिन निवेशकों के लिए अच्छे नहीं होंगे। इसका प्रमाण गुरुवार की गिरावट के रूप में सामने आया जब एक ही दिन में निवेशकों को ग्यारह लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लगी। शेयर बाजार में संस्थागत निवेशकों और विदेशी संस्थागत निवेशकों के अलावा छोटे निवेशक भी काफी पैसा लगाते हैं। भले बड़े संस्थानों पर इसका ज्यादा असर न पड़े, लेकिन छोटे निवेशकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। भारत में ऐसे लोगों की तादाद काफी ज्यादा है जो अपनी आय का एक हिस्सा शेयरों और म्युचुअल फंडों में लगाते हैं। यही उनके लिए भविष्य की एक बड़ी बचत भी होती है। ऐसे में अगर बाजार गिरता है तो निवेशकों का बैचेन होना सवभविक है। बाजार में गिरावट का दौर उस वक्त तेजी ज्यादा पकड़ता है जब विदेशी संस्थागत निवेशक अचानक से अपना पैसा निकालने लगते हैं। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से छत्तीस हजार करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। इससे बाजार में जिस तरह की अनिश्चितता का माहौल बना, वह इस हफ्ते की भारी गिरावट का बड़ा कारण बना। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर के देश जिस तरह के कदम उठा रहे हैं, उनसे उद्योग-कारोबारों पर भारी असर पड़ रहा है। कोरोना को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्वव्यापी महामारी करार दे दिया है और इसी के अनुरूप सभी देश बचाव के उपाय कर रहे हैं। ज्यादातर देशों ने अपने यहां दूसरे देशों के नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इसका सीधा असर विमानन कंपनियों और पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। यही हाल फिलीपींस, जापान से लेकर यूरोप और अमेरिका का है। भारत में अभी संकट यह है कि पर्यटन, ऑटोमोबाइल जैसे रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों पर कोरोना का प्रभाव ज्यादा है, इसलिए इनसे जुड़ी कंपनियां भी मुश्किल में हैं। आयात-निर्यात का तो बुरा हाल है। सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, अर्थव्यवस्था भी अनिश्चिता का सामना कर रही है। ऐसे में फिलहाल यह कह पाना मुश्किल है कि निकट भविष्य में हम और बाजार कोरोना से बचेंगे? परेशान नहीं सजग होइये।

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